Thursday, October 8, 2026
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जोशीमठ में घर बनाने का सपना आंखों में लिए सदा के लिए विदा हो गए ‘क्रांतिवीर’ विश्वनाथ नाना पाटेकर, उत्तराखंड से था ‘खामोश’ लगाव

देहरादून। नाना पाटेकर नहीं रहे। उनके साथ ही हिंदी और मराठी सिनेमा के एक युग का अंत हो गया है। बहुत कम अभिनेता हुए हैं, जिनके निभाए अधिकांश किरदार दर्शकों के दिल-ओ-दिमाग पर दर्ज हुए हैं। नाना, अभिनेताओं की इस श्रेणी में भी थोड़ा ऊपर ही रहे हैं। उनके अधिकांश नहीं, तकरीबन हर किरदार देखने वालों के मन-मस्तिष्क पर अमिट हैं। उनके डायलॉग हर सुनने वालों के कानों में वर्षों बाद भी गूंजते हैं। देश -दुनिया के करोड़ों दिलों पर राज करने वाले नाना पाटेकर का उत्तराखंड की वादियों से खासा लगाव था। वे अक्सर निजी दौरे पर यहां आते थे-ट्रैक करते थेे, मगर इतनी खामोशी से कि किसी को कानो-कान खबर नहीं होती थी। साल-2022 में उनकी मराठी फिल्म की शूटिंग गढ़वाल मंडल की कई खूबसूरत लोकेशंस पर हुई। बॉलीवुड के इस शीर्ष कलाकार का मन जोशीमठ क्षेत्र में ऐसा रमा कि वे यहां घर बनाकर रहने के इच्छुक थे। वीरवार को उनका यह सपना हमेश के लिए अधूरा सपना बनकर ही रह गया।

नाना के करोड़ों प्रशंसकों के लिए स्तब्ध कर देने वाली दुःखद सूचना के साथ हुई वीरवार की सुबह

1 जनवरी 1950 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में जन्मे नाना ने 75 वर्ष की आयु में वीरवार तड़के गोवा में अंतिम सांस ली। मराठी फिल्मों से अपने कॅरियर की शुरूआत करने वाले विश्वनाथ पाटेकर यानी नाना ने एक बार हिंदी सिनेमा के पर्दे पर एंट्री की, तो ऐसे छाए कि क्या बच्चा-क्या बड़ा, क्या युवा या बुजुर्ग, यहां तक कि हर उम्र की महिलाएं भी उनके अभिनय के मुरीद हो गए। नाना दर्शकों को अंदर तक झखझोर कर स्पष्ट सामाजिक संदेश  देने वाली फिल्मों के अप्रतिम नायक थे। वे जब-जब खलनायक बने, तो बेहद उम्दा। जब कभी कॉमेडी की, तो वह भी उत्कृष्ट। यानी, हर फन में माहिर थे नाना। संवाद अदायगी का उनका खास अंदाज सभी को अपनी ओर खींचता रहा है। यही वजह है कि आज तीन दशक बाद भी उनकी ‘क्रांतिवीर’ सरीखी फिल्मों के डायलॉग मंचीय कार्यक्रमों से लेकर आमजन की बातचीत तक सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं।

अक्तूबर-2022 में केदारनाथ, नीति वैली, जोशीमठ नृसिंह मंदिर, चोपता समेत कई जगह हुई थी नाना की मराठी फिल्म ‘ओले आले’ की शूटिंग

नाना पाटेकर उत्तराखंड कई मर्तबा आए, मगर एकदम खामोशी से। अलबत्ता, उनका उत्तराखंड का चर्चित दौरा साल-2022 में हुआ, जब वे पहली और आखिरी बार यहां फिल्म शूटिंग के लिए पहुंचेे। सितंबर आखिरी सप्ताह में फिल्म की यूनिट यहां पहुंची थी, जिसमें नाना भी शामिल रहे और 9 दिन तक शूटिंग व अन्य गतिविधियों में हिस्सा लेने के बाद नाना अक्तूबर पहले सप्ताह में यहां से विदा हुए। कोकोनट मोशन पिक्चर्स के बैनरतले निर्मित ‘ओले आले’ नामक यह मराठी फिल्म 5 जनवरी 2024 को रिलीज हुई थी। पिता-पुत्र के संबंधों पर आधारित इस फिल्म में नाना के साथ मराठी सिनेमा के कलाकार सिद्धार्थ चांदेकर ने पुत्र की भूमिका निभाई, जबकि सायली संजीव, मकरंद अनासपुरे, तन्वी आजमी और उत्तराखंड के हरीश पुरी व अभिषेक आदि अन्य कलाकार भी इसमें थे।

निर्माता रश्मिन मजीठिया और निर्देशक विपुल मेहता की इस फिल्म शूटिंग देहरादून, ऋषिकेश, स्वर्गाश्रम, जोशीमठ, नृसिंह मंदिर, नीति घाटी, तपोवन, लाता, चोपता, केदारनाथ समेत कई लोकेशंस पर हुई थी। इसमें नाना के साथ ही फिल्म में उनके पुत्र का किरदार निभा रहे अभिनेता व अभिनेत्री भी कुछेक दृष्यों में उत्तराखंडी परिधान में नजर आए हैं। इस कॉमेडी ड्रॉमा फिल्म में उत्तराखंड की खूबसूरती को बेहद खूबसूरत ढंग से फिल्माया गया है।

देहरादून के आरोग्यधाम हॉस्पिटल में हुआ था नाना का ‘फिल्मी’ सीटी स्कैन, कंडवाल दंपत्ति की शादी की मनाई सालगिरह

‘ओले-आले’ में नाना पाटेकर पर एक दृश्य देहरादून के न्यू रोड स्थित डॉ. विपुल कंडवाल के आरोग्यधाम सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में भी शूट किया गया। इस दृश्य की शूटिंग के लिए नाना 3 अक्तूबर 2022 को आरोग्यधाम पहुंचे। शूटिंग 4 अक्तूबर को पूरी हुई। 3 अक्तूबर को कंडवाल दंपत्ति की विवाह की वर्षगांठ भी होती है। 3 अक्तूबर की शाम हॉस्पिटल में ही डॉ. कंडवाल और उनकी पत्नी डॉ. प्राची कंडवाल ने सालगिरह पर केक काटा। नाना खुद इस अवसर पर मौजूद रहे और कंडवाल दंपत्ति को शुभकामनाएं दीं। वे कंडवाल दंपत्ति के साथ डिनर में भी शामिल हुए।

डॉ. कंडवाल कहते हैं कि सिनेमा जगत की ऊंचाइयों पर होने के बावजूद नाना जमीन से जुड़े रहे हैं। वे अपने आचरण, खान-पान, रहन-सहन, सहजता-सौम्यता में आम ‘उत्तराखंडी’ का ही ‘प्रतिरूप’ थे। डॉ. कंडवाल बताते हैं कि आरोग्यधाम में नाना पाटेकर के सीटी स्कैन का दृश्य फिल्माया गया। इस दृश्य में उन्हें पेट में दिक्कत और कैंसर की आषंका के चलते पेशेंट के रूप में लाया गया था। शूटिंग के दौरान भी उनका व्यवहार सभी के साथ मित्रवत रहा।

लाइमलाइट से दूर चुपचाप उत्तराखंड आते रहे नाना, फूलों की घाटी समेत कई ट्रैक किए

डॉ. विपुल कंडवाल बताते हैं कि नाना पाटेकर का उत्तराखंड से गहरा लगाव था और यहां के पहाड़ उनके लिए अजनबी नहीं थे। वे फिल्म की शूटिंग के लिए भले ही साल-2022 में पहली उत्तराखंड आए, लेकिन निजी तौर पर प्रचार-प्रसार से दूर चुपचाप वे नियमित तौर पर यहां आते रहे हैं। दरअसल, मुंबई में उनके उत्तराखंड मूल के कुछ नजदीकी मित्र थे। इनमें कुछेक अब यहीं रहते हैं। उनके साथ नाना कई बार उत्तराखंड आए। यहां उन्होंने फूलों की घाटी समेत कई ट्रैक किए हैं। बकौल डॉ. कंडवाल, नाना को उत्तराखंड की शांति, यहां की प्राकृतिक सुंदरता और यहां के लोगों का व्यवहार काफी भाता था। उन्होंने उत्तराखंड में, खासकर जोशीमठ क्षेत्र में घर बनाकर रहने की इच्छा अपने मित्रों से कई बार जाहिर की। विडंबना यह कि उनकी इच्छा अधूरी रह गई।

स्वर्गाश्रम और ऋषिकेश में गंगा की शांत लहरों व यमकेश्वर की पहाड़ियों ने किया था अभिभूत, गंगा आरती में हुए थे शामिल

साल-2022 में नाना की मराठी फिल्म के कुछ दृष्यों की शूटिंग ऋषिकेश और स्वर्गाश्रम क्षेत्र में भी हुई थी। इसी दौरान नाना ने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद के साथ गंगा आरती में भी हिस्सा लिया था। नाना को गंगा की स्वच्छ निर्मल लहरों, स्वर्गाश्रम व ऋषिकेश क्षेत्र के आध्यात्मिक स्वरूप और गंगा पार यमकेश्वर ब्लॉक की हरी-भरी पहाड़ियों ने मंत्रमुग्ध किया। इस पूरे माहौल की खुशनुमा स्मृतियां उन्होंने उस वक्त साझा भी कीं। नाना पाटेकर ने अपने उत्तराखंड प्रवास के दौरान केदारनाथ धाम में शूटिंग के साथ ही भगवान भोलेनाथ के दर्शन किए।

धामी ने परंपरागत उत्तराखंडी टोपी पहनाकर किया था नाना का स्वागत, कुकरेती ने फोटो के रूप में सहेज ली नाना की सौगात

नाना पाटेकर ने इससे पूर्व 1 अक्तूबर देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट की थी। मुख्यमंत्री धामी ने परंपरागत उत्तराखंडी टोपी पहनाकर नाना का स्वागत किया था। मुख्यमंत्री से वार्ता के दौरान नाना ने उत्तराखंड के लोगों के व्यवहार की सराहना करते हुए उनके समक्ष भी यहां घर बनाने की इच्छा जाहिर की थी। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदेश प्रवक्ता व जिलाध्यक्ष प्रदीप कुकरेती भी अपनी किशोरावस्था से ही नाना पाटेकर की फिल्मों के जबर्दस्त फैन रहे हैं। कुकरेती बताते हैं कि 4 अक्तूबर को डॉ. कंडवाल के जरिए उन्हें पता चला कि नाना उनके अस्पताल में शूटिंग कर रहे हैं, तो वे बिना देरी किए वहां पहुंच गए। नाना से मुलाकात हुई, तो वे बहुत सहजता से मिले। फोटो खिंचवाने का आग्रह करने पर नाना तुरंत तैयार हो गए।

बकौल कुकरेती, उनके लिए यह सिर्फ फोटो नहीं थी, बल्कि नाना से मिली सौगात थी, जिसे वे हमेशा सहेजना चाहेंगे। अन्य प्रशंसकों से भी नाना काफी आत्मीयता से मिल रहे थे। निःसंदेह उनका जाना हिंदी सिनेमा के एक मजबूत स्तंभ का ढह जाना है। उनकी कमी हमेशा खलेगी।

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