हरिद्वार समेत विभिन्न जिलों में भीषण ओलावृष्टि से हुए नुकसान के सर्वे के लिए सभी डीएम को निर्देश जारी, ओलों के बड़े आकार की वजह भी आई सामने
देहरादून। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में शुक्रवार (9 अक्तूबर) को भीषण ओलावृष्टि से हुए नुकसान के आकलन के लिए सर्वे शुरू कराया जा रहा है। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) की ओर से इसके लिए सभी जिलों के डीएम को पत्र जारी किया गया है। इस बीच, हरिद्वार जिले के कुछ हिस्सों में सामान्य से बड़े आकार के ओले बरसने के पीछे की मौसमी वजह भी सामने आ गई है।
आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने जिलों में 9 अक्तूूबर को हुई भारी ओलावृष्टि व बारिश से किसानों की फसलों और परिसंपत्तियों को हुए नुकसान का आकलन कर प्रभावितों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मंत्री ने इस संबंध में आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन को पत्र लिखा। मंत्री के पत्र के क्रम में सचिव ने यूएसडीएमए को इस संबंध में निर्देश दिए। यूएसडीएमए के संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर अपने-अपने जिलों में 9 अक्तूूबर को हुई क्षति का तत्काल संबंधित विभागों के माध्यम से आकलन कराने के निर्देश दिए हैं।
आपदा प्रबंधन सचिव सुमन ने बताया कि सभी डीएम से कहा गया है कि प्रभावित क्षेत्रों में क्षति का आकलन करते समय कृषि फसलों के नुकसान के साथ-साथ जन-धन, पशुधन, आवासीय भवनों व अन्य परिसंपत्तियों को हुई क्षति का भी विवरण संकलित किया जाए। संबंधित विभागों के अधिकारियों के माध्यम से सर्वेक्षण कराते हुए प्रभावित परिवारों व व्यक्तियों को नियमानुसार राहत एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।
गौरतलब है कि शुक्रवार को हुई भारी बारिश और भीषण ओलावृष्टि से जहां ऊधमसिंह नगर जिले के कई हिस्सों में फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा, वहीं हरिद्वार जिले के बहदराबाद ब्लॉक क्षेत्र के साथ ही कई हिस्सों में फसलों के अलावा लोगों को वाहनों व अन्य संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा। ओलों का आकार काफी बड़े होने के कारण कारों के शीशे टूट गए और कई लोगों को चोटें आईं। लोगों का कहना था कि उन्होंने पहली बार इस तरह की ओलावृष्टि देखी। वहीं, मौसम विषेषज्ञों ने ओले के असामान्य आकार और तीव्रता की असल वजह बताई है।
जमीन से 14 किमी. ऊपर बना था क्यूमुलोनिंबस क्लाउड, अरब सागर से बड़ी मात्रा में खींची नमी
जाने-माने मौसम विज्ञानी और भारत मौसम विज्ञान विभाग नई दिल्ली की पूर्व उप-महानिदेशक डॉ. आनंद शर्मा का कहना है कि ओलों के आकार में वृद्धि असामान्य घटना नहीं है। हरिद्वार में जो ओले गिरे उनका आकार कंचे (कांच की गोलियां) से बड़ा और गोल्फ बॉल से थोड़ा छोटा था। डॉ. शर्मा का कहना है कि ‘क्यूमुलोनिंबस क्लाउड’ इस स्थिति की वजह बना। ‘क्यूमुलोनिंबस क्लाउड’ काफी घना, भारी और ऊर्ध्वाधर (वर्टिकली ग्रोइंग) बादल होता है, जो पहाड़ या विशाल मीनार की तरह ऊपर की ओर उठता है। रडार पिक्चर में यह जमीन से करीब 14 किलोमीटर ऊपर था। अरब सागर से प्रचूर मात्रा में नमी मिल रही थी और वेस्टर्ली ट्रफ भी बनी थी। इसने बड़े पैमाने पर नमी खींची, जिस कारण क्युमूलोनिंबस क्लाऊड बना।
बार-बार अपड्राफ्ट और डाउनड्राफ्ट के कारण ओलों के आकार में हुई वृद्धि
डॉ. शर्मा के अनुसार, अपड्राफ्ट और डाउनड्राफ्ट के कारण ओलों का आकार बढ़ा। अपड्राफ्ट में गर्म और नमी वाली हवा तेजी से ऊपर को उठती है। यह हवा बादलों में मौजूद पानी की बूंदों को काफी ऊपर तक ले जाती है, जहां तापमान शून्य से भी कम होता है। डाउनड्राफ्ट में ये बूंदें ठोस ओलों के रूप में नीचे को आती हैं, लेकिन नीचे से उठती गर्म हवाएं इन्हें फिर से ऊपर की ओर धकेलती हैं, जहां शून्य से भी कम तापमान होता है। इस प्रक्रिया में बार-बार बर्फ की परत चढ़ने और समय मिलने से ओलों का आकार बढ़ जाता है। यही शुक्रवार सुबह भी हुआ। जब ये ओले वजनी हो गए, तो नीचे गिरे और फसलों आदि को नुकसान पहुंचाया। डॉ. शर्मा का कहना है कि सोशल मीडिया में कई ऐसे वीडियो भी चल रहे थे, जो एआई से बनाए गए थे और जिनमें ओलों का आकार कई गुना बड़ा दिखाया गया। लोगों को इस तरह के वीडियो से भ्रमित नहीं होना चाहिए और आधिकारिक सूचनाओं पर भी विश्वास करना चाहिए।

