रामपुर तिराहा कांड के दोषियों को 32 साल बाद भी सजा न होने से उत्तराखंड आंदोलनकारी आक्रोशित, सरकारों के रवैये से नाराज
देहरादून। रामपुर तिराहा (मुजफ्फरनगर) कांड की बरसी पर शुक्रवार को राजधानी समेत प्रदेशभर में शहीदों को याद किया गया। देहरादून के कलेक्ट्रेट परिसर स्थित शहीद स्मारक में उत्तराखंड राज्य आंदोलकारी मंच की ओर से आयोजित सभा में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इस बात पर रोष व्यक्त किया गया कि 32 वर्ष बाद भी अब तक रामपुर तिराहा कांड के दोषियों को सजा नहीं हुई है। उत्तराखंड की सरकारों ने भी इस दिशा में कोई प्रयास ही आज तक नहीं किया।
श्रद्धांजलि सभा में वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी रविंद्र जुगरान, मंच के अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी व वरिष्ठ कवि डॉ. अतुल शर्मा ने कहा कि आज 32 वर्षों के बाद भी हम शहीदों के गुनहगारों को सजा नहीं दिला पाए और न ही उनके सपनों को ही पूरा करा पाए। स्थायी राजधानी, मज़बूत भू-कानून, मूल निवास, रोजगार नीति, पहाड़ों पर उच्च शिक्षा व बेहतर स्वास्थ्य सुविधा आदि के मामले में कुछ नहीं हुआ। मंच के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती, वरिष्ठ आंदोलनकारी जयदीप सकलानी व द्वारिका बिष्ट ने कहा कि हमारे जनप्रतिनिधि और अधिकारी केवल व्यक्तिगत स्वार्थ तक सीमित हो गए हैं। राज्य की वास्तविक जरूरतों औऱ परिस्थतियों के मुताबिक योजनाओं पर कार्य किया जाना चाहिए।
वरिष्ठ आंदोलनकारी विवेकानंद खंडूरी, पुष्पलता सिल्माना व पूर्व पार्षद गणेश डंगवाल ने कहा कि हम शहीदों को आज तक न्याय नहीं दिला पाए। सरकारें आती रहीं-जाती रहीं, लेकिन न्याय के मामले में मौन रहीं। प्रदेश से भ्रष्टाचार पर कड़ी चोट करनी होगी तभी हमारे शहीदों के सपने पूर्ण होंगे। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में शहीद राजेश रावत की माता आनंदी रावत, केशव उनियाल, मंच के महामंत्री रामलाल खंडूड़ी, पूरण सिंह लिंगवाल, ललित जोशी, मोहम्मद शाहिद, बीएस पयाल, विशम्भर दत्त, यशवंत सिंह रावत, सुरेश नेगी, मोहन थापा, चंद्र किरण राणा समेत बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी मौजूद रहे।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व मंत्री खजानदास ने भी कलेक्ट्रेट स्थित शहीद स्मारक पहुंच कर आंदोलन के शहीदों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री को इस अवसर पर 110 दिन से आंदोलित आंदोलनकारियों के संयोजक अंबुज शर्मा ने मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि उनके संज्ञान में पूरा मामला है।

