सुबह जंतर-मंतर पर मंच से इस्तीफा देकर उत्तराखंड पुलिस के जवान ने मचाई सनसनी, अपराह्न आईजी ने किया कांस्टेबल शेर सिंह पर सनसनीखेज खुलासा
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर कॉक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) की अगुआई में चल रहे छात्र-युवा आंदोलन के मंच पर शुक्रवार को उस वक्त सनसनी फैल गई, जब उत्तराखंड पुलिस के कांस्टेबल शेर सिंह ने नौकरी छोड़ने की घोषणा करते हुए अपना इस्तीफा और बैज सीजेपी मुखिया अभिजीत दीपके को सौंप दिए। इस घटना का वीडियो वायरल होते ही उत्तराखंड पुलिस से लेकर शासन और सरकार तक हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पुलिस अधिकारी सक्रिय हुए, तो सनसनी फैलाने वाले पुलिस जवान शेर सिंह के मामले में सनसनीखेज खुलासा हो गया। पिथौरागढ़ जिले में तैनात षेर सिंह इन छह दिन पूर्व न केवल सस्पेंड हो चुका है, बल्कि पिछले साल हरिद्वार जिले में तैनाती के दौरान आपराधिक मामले में जेल भी जा चुका है।
पिथौरागढ़ में तैनात कांस्टेबल जून से है गैरहाजिर, छह दिन पहले ही किया गया सस्पेंड
कुमाऊं रेंज की पुलिस महानिरीक्षक निवेदिता कुकरेती ने दोपहर बाद इस मामले में बयान जारी कर कहा कि कांस्टेबल शेर सिंह का छात्र आंदोलन में उकसाने वाला अनर्गल बयान वायरल हो रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि उक्त कांस्टेबल 28 जून से पिथौरागढ़ जिले से गैरहाजिर था। इस संबंध में पिथौरागढ़ के एसपी ने उसे नोटिस भी दिया, जिसका उसने कोई जवाब नहीं दिया। इस पर उसे 20 जुलाई को सस्पेंड कर दिया गया।
संगठित अपराध में लिप्त होने पर पिछले वर्ष हरिद्वार जिले से जा चुका जेल: आईजी
आईजी ने जानकारी दी कि उक्त कांस्टेबल का पूर्व में भी आपराधिक इतिहास रहा है। यह कांस्टेबल और उसका एक अन्य साथी प्रवीण वाल्मीकि जैसे कुख्यात गैंगस्टर के साथ मिलकर संगठित अपराध में लिप्त थे। ये लोग भोले-भाले लोगों को डरा-धमकाकर उनकी जमीन को कब्जा करते थे। इस संबंध में इनके विरूद्ध हरिद्वार जिले में मुकदमा दर्ज किया गया था। पिछले साल 15 सितंबर को कांस्टेबल शेर सिंह को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था। यह कई महीने जेल रहा और वर्तमान में जमानत पर बाहर है। इस संबंध में इसके विरूद्ध बर्खास्ती की कार्रवाई चल रही थी। उन्होंने कहा कि अब इसने जो अनर्गल बयानबाजी की है, इस संबंध में भी इसके विरूद्ध वैधानिक व विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

