सरस्वती विहार में कलश यात्रा के साथ हुआ शी महापुराण का शुभारंभ
देहरादून। सरस्वती विहार स्थित शिव शक्ति मंदिर में वीरवार से शिव महापुराण का शुभारंभ हुआ। सरस्वती विहार विकास समिति, अजबपुर खुर्द की ओर से इसका आयोजन किया जा रहा है, जहां कथा व्यास आचार्य महामाया प्रसाद शिव महापुराण की कथा सुन रहे हैं। आज पहले दिन सुबह 10 बजे शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें क्षेत्र के लोगों ने बारिश होने के बावजूद बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

पहले दिन कथा व्यास ने शिव की महिमा के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। उन्होंने कहा कि कथा शुरू होने से पूर्व माताएं कलश में गंगाजल डालकर नंगे पैर कलश यात्रा निकलती हैं, तो यह कई अश्वमेध यज्ञ के बराबर माना जाता है। इस संदर्भ में उन्होंने पांडवों के अश्वमेध के बारे में बताते हुए कहा कि जब उन्होंने अश्वमेध यज्ञ किया, तो उसमें एक ऋषि छूट गए। इस कारण अश्वमेध यज्ञ पूर्ण नहीं हो सका। जब भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को उन ऋषि महाराज को अश्वमेध यज्ञ में लाने के लिए कहा तो पांडव ऋषि के पास गए, उन्होंने कहा कि मुझे वही न्योता देगा, जिन्होंने सैकड़ो अश्वमेध यज्ञ किए हों।

कथा व्यास ने कहा कि ऋषि की बात सुनकर पांडव वापस आ गए। जब यह बात द्रौपदी को पता चली तो उन्होंने कहा कि ऋषि को मैं लेकर आती हूं। द्रौपदी कलश में गंगाजल लेकर नंगे पांव शिवजी का ध्यान करते हुए ऋषि मुनि के पास पहुंची। उन्हें देखकर ऋषि मुनि ने पांडवों को दिया उत्तर ही दोहराया। इस पर द्रौपदी ने कहा कि महाराज मैंने सैकड़ों के बजाय हजारों और लाखों अश्वमेध यज्ञ किए। इस पर ऋषि ने कहा, कब किए। द्रौपदी ने कहा, शास्त्रों में लिखा है कि जो कलश में गंगाजल लेकर शिव जी का ध्यान करते हुए यात्रा करेगा उसको लाखों अश्वमेघ यज्ञ के समान होगा। ऋषि महाराज में द्रौपदी की बात मानी और पांडवों के अश्वमेध यज्ञ को सफल किया।
इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष पंचम सिंह बिष्ट, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बीएस चौहान, उपाध्यक्ष कैलाश राम तिवारी, सचिव गजेंद्र भंडारी, मंदिर समिति संयोजक मूर्ति राम बिजलवान, सहसंयोजक दिनेश जुयाल, वरिष्ठ मंत्री अनूप सिंह फर्तियाल, विजय सिंह रावत, मंगल सिंह कुट्टी, जयप्रकाश सेमवाल, चिंतामणि पुरोहित, बसंत सिंह दफोनी, बीपी शर्मा, पीएल चमोली, आशीष गुसांईं, आचार्य उदय प्रकाश नौटियाल, आचार्य सुशांत जोशी, आचार्य अखिलेश बधानी, वेद किशोर शर्मा, पुष्कर सिंह भंडारी, पुष्कर सिंह नेगी, ध्यानचंद रमोला आदि उपस्थित थे।

