भाजपा सांसद अनिल बलूनी ने पलटी बाजी, इधर कांग्रेस और जन-संगठन प्रदर्शन में थे व्यस्त, उधर अंकिता के माता-पिता की सीबीआई अफसरों से करा दी मुलाकात
नई दिल्ली/देहरादून। अंकिता भंडारी के माता-पिता को अपने पाले मेंबकरने को लेकर कांग्रेस और भाजपा में शह-मात का खेल तेज हो गया है। इंडिया गेट पर भंडारी दंपत्ति के धरना-प्रदर्शन और उसमें राहुल-प्रियंका समेत पूरी कांग्रेस के सड़कों पर उतर आने के बाद बेचैन भाजपा को शुक्रवार को बाज़ी पलट दी। एक ओर जब कांग्रेस और जन-संगठन अंकिता को न्याय और दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे, तब अंकिता के माता-पिता भाजपा सांसद अनिल बलूनी के साथ सीबीआई अधिकारियों से मुलाकात कर रहे थे। वहीं दूसरी ओर, भाजपा के गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के बाद वहां भी छात्रों के बीच विरोध के स्वर उभरने लगे हैं।
बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी के खुलासे के लिए संघर्षरत वीरेंद्र सिंह भंडारी व सोनी देवी बीते बुधवार अपराह्न अचानक इंडिया गेट के बाहर धरने पर बैठ गए थे। उनकी मांग थी कि सीबीआई जांच पूरी होने तक भाजपा नेता दुष्यंत गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में की गई नियुक्ति रद्द की जाए। उनके धरने पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी व कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी भी शामिल हुए। रातभर धरना-प्रदर्शन के बाद वीरवार तड़के दिल्ली पुलिस ने भंडारी दंपत्ति व कांग्रेस सांसदों समेत काफी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया था। इसके बाद अंकिता भंडारी मामला एक बार फिर दिल्ली से उत्तराखंड तक तूल पकड़ गया।
वीरवार को देहरादून में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, हरक सिंह रावत समेत काफी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राजभवन के समक्ष प्रदर्शन किया। पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। श्रीनगर में गढ़वाल विश्वविद्यालय के विभिन्न छात्र संगठनों और जन संगठनों ने प्रदर्शन किया। शुक्रवार को उत्तराखंड में विरोध प्रदर्शन का सिलसिला और तेज हो गया। अंकिता न्याय यात्रा मंच की अगुआई में देहरादून के गांधी पार्क में प्रदर्शन किया गया, जिसमें मोहित डिमरी, निर्मला बिष्ट, इन्द्रेश मैखुरी, सतीश धौलाखंडी समेत वामपंथी संगठन भी शामिल हुए। वहीं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को शहर में दुपहिया रैली निकाल कर अंकिता को न्याय व दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर रोक की मांग की। कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी शैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, विधायक प्रीतम सिंह, पूर्व विधायक हरक सिंह, कारण माहरा, शूरवीर सजवाण, पार्टी पदाधिकारी सूर्यकांत धस्माना, ज्योति रौतेला, गरिमा दसौनी समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रैली में शामिल हुए।

उधर, श्रीनगर गढ़वाल में ‘जस्टिस फॉर अंकिता कमेटी’ ने सिक्किम के राज्यपाल के रूप में दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के विरोध में राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन पर हस्ताक्षर अभियान चलाया। कमेटी नेता डॉ. मुकेश सेमवाल की अगुआई में चलाए गए हस्ताक्षर अभियान में महिला अधिकार कार्यकर्ता रेशमा पंवार, एआईएमएसएस से सरस्वती देवी, सामाजिक कार्यकर्ता विनीता खंडूरी, अनिल तिवारी, प्रभाकर बाबुलकर, भारत सिंह असवाल, एआईडीएसओ से निशा बिष्ट, रितुराज और तन्मय उपस्थित रहे। डॉ. सेमवाल ने बताया कि यह अभियान आने वाले दिनों में शहर के अन्य हिस्सों में भी जारी रहेगा। दूसरी ओर , सिक्किम विश्वविद्यालय छात्र संगठन ने अंकिता भंडारी मामले में लिखित बयान जारी करते हुए सिक्किम के राज्यपाल के रूप में की गई दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए राष्ट्रपति से इस पर पुनर्विचार की अपील की है।
राज्यपाल के रूप में दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के बाद अंकिता भंडारी मामले के फिर से तूल पकड़ने और इसमें कांग्रेस के बड़े नेताओं की भागीदारी से भाजपा की मुश्किलें बढ़ती दिख रही थीं। इसकी वजह यह भी है कि उत्तराखंड में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में भयभीत भाजपा को उस वक्त बाजी कांग्रेस और जन संगठनों के हाथ से छीनने में कामयाबी मिल गई, जब गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने अंकिता के माता-पिता को साथ ले जाकर उनकी मुलाक़ात सीबीआई अधिकारियों से करवाई। इसकी विज्ञप्ति और फोटो बाकायदा सीबीआई और पीआईबी की ओर से जारी की गई। फोटो में अंकिता के माता-पिता के साथ सांसद अनिल बलूनी भी मौजूद नजर आ रहे हैं। विज्ञप्ति में कहा गया है कि आज 16 अक्टूबर को स्वर्गीय अंकिता भंडारी के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी व माता सोनी देवी ने सीबीआई मुख्यालय दिल्ली में वरिष्ठ अधिकारियों से भेंट की और प्रकरण से संबंधित विभिन्न बिंदुओं के बारे में जानकारी दी। सीबीआई अधिकारियों ने उन्हें प्रकरण के सभी पहलुओं का समुचित परीक्षण करते हुए विवेचना निष्पक्ष व न्यायसंगत ढंग से करने का आश्वासन दिया। हालांकि, विज्ञप्ति में न सीबीआई और न ही पीआईबी की ओर से यह बताया गया कि जिन अधिकारियों से मुलाकात की गई और जिन्होंने आश्वासन दिया, वे किस पद पर हैं। उनका नमोल्लेख भी नहीं किया गया है।

