कथा व्यास ने त्रिपुंड, रुद्राक्ष और बिल्वपत्री के महात्म्य पर डाला प्रकाश
देहरादून। सरस्वती विहार विकास समिति की ओर से सरस्वती विहार (अजबपुर खुर्द) स्थित शिव शक्ति मंदिर में आयोजि शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन शनिवार को कथा व्यास ने त्रिपुंड, रुद्राक्ष और बिल्व पत्री के महात्म्य पर प्रकाश डाला।
सरस्वती विहार के शिव शक्ति मंदिर में हो रहा शिव महापुराण क्या का आयोजन
कथा व्यास आचार्य महामाया प्रसाद ने कहा कि भगवान शिव को विभूति, रुद्राक्ष और बिल्व पत्री अत्यंत प्रिय हैं। शिव भक्त को अपने मस्तक पर विभूति का त्रिपुंड और कंठ में रुद्राक्ष की माला अवश्य धारण कर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। रुद्राक्ष माला को धारण करते समय भक्तों को शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिव महापुराण की विद्येश्वर संहिता में भगवान शिव, माता पार्वती को बताते हैं कि बिना विभूति और रुद्राक्ष माला के मेरी पूजा व्यर्थ हो जाती है। कथा व्यास ने कहा कि बिल्वपत्री के वृक्ष को साधारण नहीं, अपितु साक्षात शिव रूप में पूजना चाहिए। प्रतिदिन चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप, नैवेद्य से पूजन करना चाहिए। अमावस्या, अष्टमी, नवमी, संक्रांति और सोमवार को भूल से भी बिल्भपत्री नहीं तोड़नी चाहिए।
शनिवार को शिव महापुराण कथा श्रवण करने वालों में समिति के अध्यक्ष पंचम सिंह बिष्ट, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बीएस चौहान, उपाध्यक्ष कैलाश राम तिवारी, सचिव गजेंद्र भंडारी के साथ ही बड़ी संख्या में कॉलोनीवासी मौजूद रहे।

