पुल बन गया-ट्रैफिक चल गया, एप्रोच रोड धसी तो जांच में खुला राज, कंसलटेंट ने डिजाइन में ही नहीं किए थे सुरक्षात्मक प्रावधान, तीन इंजीनियर सस्पेंड
देहरादून। बल्लूपुर-पांवटा पुराना नेशनल हाईवे (चकराता रोड) पर नंदा की चौकी क्षेत्र में नए बने पुल की एप्रोच रोड धसने की जांच रिपोर्ट में ‘चौंकाने वाला’ खुलासा हुआ है। अब सामने आया है कि पुल के डिजाइन में ही गड़बड़ी थी। डिजाइन कंसलटेंट ने इसमें वे जरूरी प्रावधान ही नहीं किए थे, जो एप्रोच रोड और पुल की सुरक्षा के लिए किए जाने चाहिए थे। इतना ही नहीं, इस मामले में टेक्निकल मॉनिटरिंग और क्वालिटी कंट्रोल समेत विभिन्न स्तरों पर पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं की घोर लापरवाही भी उजागर हुई है। जांच रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए शासन ने पीडब्ल्यूडी (प्रांतीय खंड) के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) राजेश कुमार, सहायक अभियंता (एई) अमित त्यागी व अवर अभियंता (जेई) नवीन गैरोला को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। साथ ही डिजाइन कंसलटेंट के विरूद्ध भी कार्रवाई करने के निर्देश पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता को दिए हैं।
बल्लूपुर-पांवटा पुराने हाईवे पर 16 दिन में ही धस गई थी 16 करोड़ से बने टोंस नदी के नए पुल की एप्रोच रोड
राजधानी देहरादून में नंदा की चौकी क्षेत्र में टोंस नदी पर बना पुल का एक हिस्सा पिछले सितंबर-2025 में भारी बारिश के कारण आए उफान में टूट गया था। प्रदेश सरकार ने इसके स्थान पर पीडब्ल्यूडी के माध्यम से नया पुल बनवाया। करीब 10 महीने में 16 करोड़ रूपये की लागत से नए बनाए गए पुल को 13 जुलाई को आवाजाही के लिए खोल दिया गया। 28 जुलाई की तड़के पुल की एप्रोच रोड का एक बड़ा हिस्सा अचानक धस गया। संयोग से उस वक्त पुल से कोई वाहन नहीं गुजर रहा था, जिस कारण जनहानि होने से बच गई। 16 करोड़ की लागत से बने पुल का हिस्सा 16 दिन भी न टिक पाने से मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक सरकार की काफी किरकिरी हुई। निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने के साथ ही भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे। विपक्षी कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाते हुए पार्टी उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना की अगुआई में उसी सुबह पुल पर ही विरोधस्वरूप धरना-प्रदर्शन किया। चौतरफा सवाल उठने के बाद सरकार ने आनन-फानन में पीडब्ल्यूडी सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय को उच्चस्तरीय जांच कराने के निर्देश दिए।
मुख्य अभियंता की जांच रिपोर्ट में गंभीर लापरवाही व खामियां उजागर, डिजाइन कंसलटेंट को ठहराया जिम्मेदार
सचिव डॉ. पांडेय ने पीडब्ल्यूडी के क्षेत्रीय कार्यालय (देहरादून) के मुख्य अभियंता (स्तर-1) को जांच सौंपी। उन्हें पूरी घटना का उत्तरदायित्व तय करते हुए रिपोर्ट देने के लिए कहा गया। मुख्य अभियंता ने 3 अगस्त को अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी। रिपोर्ट में गंभीर किस्म की लापरवाही व खामियों को उजागर करते हुए नव-निर्मित पुल की एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने के लिए संबंधित डिजाइन कंसलटेंट/प्रूफ चेकिंग कंसलटेंट को जिम्मेदार माना गया है। साथ ही उक्त पुल को भविष्य में किसी क्षति से बचाने के लिए सुझाव भी दिए हैं। पीडब्ल्यूडी सचिव ने इस आरंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रमुख अभियंता को संबंधित डिजाइन कंसलटेंट/प्रूफ चेकिंग कंसलटेंट के विरूद्ध तत्काल कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। हालांकि, डिजाइन कंसलटेंट/प्रूफ चेकिंग कंसलटेंट कौन है, आदेश में उसके नाम का खुलासा नहीं किया गया है। अलबत्ता, तीन निलंबित अधिकारियों के नाम जरूर उजागर किए गए हैं।
पीडब्ल्यूडी एक्सईएन, एई और जेई टेक्निकल मॉनिटरिंग व क्वालिटी कंट्रोल समेत दायित्वों के प्रति लापरवाही के दोषी
सचिव डॉ. पांडेय ने पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के एक्सईएन राजेश कुमार, एई अमित त्यागी व जेई नवीन गैरोला को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। उक्त कार्य को देख रहे एक्सईएन राजेश कुमार के निलंबन आदेश में कहा गया है कि उन्होंने तकनीकी निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण, अनुबंधीय शर्तों का अनुपालन व अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं किया, जो प्रथमदृष्टया शासकीय कार्यों के प्रति घोर लापरवाही, पर्यवेक्षण में शिथिलता व अपने दायित्वों के निर्वहन में गंभीर त्रुटि का द्योतक है, जिसके कारण शासन की छवि धूमिल हुई और सार्वजनिक हित प्रभावित हुआ। वहीं, एई त्यागी व जेई गैरोला के निलंबन आदेश में उक्त आरोपों के साथ ही उच्चाधिकारियों को तकनीकी कमियों से अवगत न कराने का भी आरोप लगाया गया है।
डिजाइन कंसलटेंट ने देना था, मगर नहीं दिया रिवर डायवर्जन वर्क का डिजाइन, एक ही स्पान की ओर केंद्रित हो गया नदी का बहाव
पीडब्ल्यूडी सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय की ओर से जारी कार्यालय आदेश में प्रारंभिक जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि टोंस नदी पर नव-निर्मित पुल की एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने संबंधी जांच आख्या में यह तथ्य प्रथमदृष्टया परिलक्षित हुआ है कि डिजाइन कंसलटेंट ने नदी मार्ग परिर्वतन कार्य का डिजाइन देना था, जो नहीं दिया गया। डिजाइन कंसलटेंट के स्तर से रिवर बेड के क्रॉस स्लोप व नदी के घुमावदार प्रवाह् का विचार करते हुए नदी नियंत्रण संबंधी उपाय दिए जाने चाहिए थे, जो नहीं दिए गए। फलस्वरूप नदी प्रवाह् एक ही स्पान की ओर केंद्रित हो गया, जिससे पुल के एबटमेंट की अपस्ट्रीम में भारी कटाव होने से एप्रोच रोड में कैविटी पैदा हुई और वह क्षतिग्रस्त हो गई।

