अलविदा ‘डीसीपी चित्रोले’ : देहरादून के भगवान दास क्वार्टर से निकल कर बीपी सिंह ने छोटे पर्दे पर रची भय और रहस्य-रोमांच की दुनिया
देहरादून। सीआईडी के डीसीपी ‘चित्रोले’ अब इस दुनिया में नहीं हैं। आज बुधवार को उन्हें मुंबई में अंतिम विदाई दी जा रही है। डीसीपी चित्रोले यानी बीपी सिंह उन चुनिंदा निर्माता-निर्देशकों में से एक रहे हैं, जिन्होंने भारत में टीवी धारावाहिकों की मनोरंजक दुनिया में रहस्य, रोमांच और सिहरन की नई इबारत लिखी, या कहें शुरुआत की। सोनी टीवी पर ‘आहट’ और ‘सीआईडी’ के जरिए मनोरंजन की एक अलग दुनिया रचने वाले बृजेंद्र पाल सिंह का उत्तराखंड और खासकर देहरादून से गहरा रिश्ता था। बीपी यहीं देहरादून में जन्मे, यहीं पढ़े और पले-बढ़े। बहुत कम लोग ही इस बात से वाकिफ हैं कि बीपी सिंह यहां भगवान दास क्वार्टर निवासी वरिष्ठ पत्रकार और उत्तरांचल प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह आर्य के भाई (ताऊ के पुत्र) थे।
दूरदर्शन समाचार के कैमरामैन से शुरू हुआ करियर, मर्डर मिस्ट्री पर आधारित ‘सिर्फ चार दिन’ से बने लेखक और निर्माता-निर्देशक
छोटे पर्दे के जाने-माने निर्माता-निर्देशक और बतौर कलाकार डीसीपी शमशेर सिंह चित्रोले सरीखी भूमिका में अपने गंभीर अभिनय की छाप छोड़ने वाले बीपी सिंह ने 1973 में दूरदर्शन के मुंबई केंद्र में न्यूज कैमरामैन के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी। पूना के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से प्रशिक्षित बृजेंद्र पाल सिंह की रहस्य-रोमांच के प्रति रचनात्मक रुचि अपने करियर की शुरुआत से ही रही और उन्होंने सबसे पहले बतौर लेखक, निर्माता और निर्देशक दूरदर्शन के लिए मर्डर मिस्ट्री पर आधारित टेलीफिल्म ‘सिर्फ चार दिन’ बनाई, जिसका प्रसारण 1985 में हुआ। इसमें नाना पाटेकर ने भी अभिनय किया था। बीपी सिंह ने निर्माता-निर्देशक के रूप में 1988 में शिवाजी साटम (सीआईडी के एसीपी प्रद्युम्न) को लेकर क्राइम थ्रिलर ‘एक शून्य शून्य’ बनाया। यह मराठी धारावाहिक दूरदर्शन के बंबई केंद्र से प्रसारित हुआ।
सोनी की शुरुआत के साथ बृजेंद्र पाल सिंह की ‘आहट’ ने टीवी के रचना संसार में दी हॉरर की दस्तक
अक्तूबर-1995 में सोनी टीवी की शुरुआत जिन धारावाहिकों के साथ हुई, उनमें प्रमुख और सबसे चर्चित था ‘आहट…।’ हिंदुस्तानी टीवी दर्शकों को हॉरर सीरियल का रोमांच देने वाले निर्माता-निर्देशक भी बीपी सिंह ही थे। क्राइम थ्रिलर के तौर पर शुरू होकर पूरी तरह हॉरर शो में बदले आहट के साल-2015 तक कुल 6 सीजन आए, जिनमें अलग-अलग समय में ओमपुरी, आशुतोष राणा, टॉम ऑल्टर, मंदिर बेदी और शिवाजी साटम समेत कई प्रमुख कलाकारों ने काम किया। रात को घरों में भूतिया डर और उत्सुकता मिश्रित सिहरन उत्पन्न करने वाले आहट ने जल्द ही घर-घर में लोकप्रियता हासिल कर ली।
‘सीआईडी’ के सृजन से 20 साल तक घर-घर बनाई पैठ, डीसीपी चित्रोले बन पाई लोकप्रियता
साल-1998 में बीपी सिंह लेकर आए रहस्य-रोमांच से भरा वह क्राइम थ्रिलर, जिसने मनोरंजन की दुनिया को एक नया आयाम तो दिया ही, घर-घर तक गहरी पैठ भी बनाई। यह सीरियल था एसपीपी प्रद्युम्न, दया, अभिजीत, डॉ. सालुंके, पूर्वी, तारिका, फ्रेडी सरीखे किरदारों से सजा ‘सीआईडी…।’ बीपी सीआईडी के निर्माता-निर्देशक तो थे ही, इसमें बतौर कलाकार भी शामिल हुए। एसीपी प्रद्युम्न के बॉस डीसीपी चित्रोले बने थे बीपी। दोनों में पर्दे पर खूब खींचतान होती थी। अपने इस किरदार को बीपी ने हर बार बेहद प्रभावशाली ढंग से निभाया। साल-1998 से साल-2018 तक पूरे 20 साल चले सीआईडी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एसीपी प्रद्युम्न का हाथ हिलाते हुए बोला जाने वाला तकिया कलाम, ‘कुछ तो गड़बड़ है दया…कुछ तो गड़बड़ है’ और ‘दरवाजा तोड़ दो दया…,’ लोगों की जुबां पर आज भी चढ़े हैं।
बिना रुके सबसे लंबे सिंगल शूट का गिनीज रिकॉर्ड और भारतीय टीवी जगत के पहले मूक कॉमेडी धारावाहिक निर्माण का श्रेय
बृजेंद्र पाल सिंह ने मनोरंजन की दुनिया में कीर्तिमान भी खूब बनाए। साल-2004 में सीआईडी के 111वें एपिसोड के लिए उन्होंने 111 मिनट का सिंगल शाॅट शूट किया, जो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में किसी भी टीवी शो के अब तक के सबसे लंबे निरंतर शॉट के तौर पर दर्ज है। साल-2010 में सोनी टीवी पर ‘गुटर गु’ नाम से मूक (साइलेंट) कॉमेडी धारावाहिक शुरू हुआ, जिसमें कोई संवाद नहीं था। साल-2014 तक कुल तीन सीजन में इसका प्रसारण हुआ। भारतीय टीवी धारावाहिकों के इतिहास में ‘गुटुर गु’ से पहली बार मूक कॉमेडी जैसा अनूठा प्रयोग करने वाले निर्माता बीपी सिंह ही थे।
उत्तरांचल प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह आर्य के भाई थे बीपी, पिता का था पाल स्टूडियो
बीपी सिंह देहरादून के रहने वाले थे। उनका जन्म 27 अप्रैल 1949 को यहीं हुआ था। चकराता रोड और चाट वाली गली के बीच स्थित है भगवान दास क्वार्टर नामक आवासीय कॉम्प्लेक्स। इसी भगवानदास क्वार्टर स्थित घर में उनका बचपन और युवावस्था का कुछ हिस्सा बीता। बीपी वरिष्ठ पत्रकार, उत्तरांचल प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह आर्य के ताऊजी के पुत्र थे। आर्य के पिता चार भाई थे। बीपी के पिता और उनके पिता ने पढ़ाई के बाद करियर की शुरुआत मसूरी स्थित गोयल स्टूडियो में फोटोग्राफी सीख कर की। इसके बाद बीपी सिंह के पिता क्षेत्रपाल सिंह ने यहां चकराता रोड पर ‘पाल स्टूडियो’ नाम से फोटोग्राफी का व्यवसाय शुरू किया।
सीएनआई इंटर कॉलेज और डीएवी से हुई पढ़ाई, जिस एफटीआईआई से पाया था प्रशिक्षण उसी के रहे चेयरमैन
आर्य बताते हैं कि ताऊजी के तीन पुत्र थे। बीपी मंझले पुत्र थे। छोटे पुत्र का परिवार अभी भी भगवानदास क्वार्टर में ही रहता है। बीपी सिंह ने इंटर तक की पढ़ाई यहां पलटन बाजार स्थित सीएनआई ब्वायज इंटर कॉलेज (मिशन स्कूल) से की। इस दौरान उन्हें स्काउटिंग के लिए राष्ट्रपति अवार्ड भी प्राप्त हुआ। बीपी ने इसके बाद डीएवी कॉलेज से बीएससी की। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व देहरादून से 8 बार के विधायक रहे स्व. हरबंस कपूर बीपी के कॉलेज के दौर से ही घनिष्ठ मित्र रहे। आर्य बताते हैं कि हरबंस कपूर जब डीएवी कॉलेज छात्रसंघ महासचिव पद का चुनाव लड़े तो उनके पर्चे-पोस्टर समेत प्रचार का सारा अभियान बीपी के घर से ही संचालित हुआ।
भारतीय फिल्म एवं टेलीविज़न निर्देशक संघ (आईएफटीडीए) के अध्यक्ष रहने के अलावा बीपी सिंह साल-2018 में पुणे के उस फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) के चेयरमैन भी नियुक्त हुए, जहां कभी उन्होंने कैमरे और अभिनय का ककहरा सीखा। बीपी सिंह ने अपने बचपन के स्कूल सीएनआई के साथ ही पलटन बाजार, ऋषिकेश, मसूरी, हरिद्वार को भी सीआईडी के विभिन्न एपिसोड में समय-समय पर बखूबी दर्शाया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता व डीएवी कॉलेज के पूर्व प्रचार डॉ. देवेंद्र भसीन ने बीपी सिंह के निधन पर दुख व्यक्त किया है। गौरतलब है कि डॉ. भसीन भी पूर्व में भगवान दास क्वार्टर में पाल परिवार के पड़ोसी रहे हैं।

