अफसरशाही की ‘कुंडली’ पर जताया गया आक्रोश, उत्तराखंड की दशा-दिशा पर हुआ गहन चिंतन
देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के दो दिवसीय प्रदेशस्तरीय सम्मेलन में रविवार को पूरे दिन गहन मंथन हुआ। मंथन, राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं-मांगों पर और राज्य की दशा-दिशा पर। सम्मेलन में जहां राज्य आंदोलनकारियों के लिए की गई मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर अफसरशाही के कुंडली मार कर बैठने को लेकर आक्रोश व्यक्त किया गया, वहीं पलायन, रोजगार, शिक्षा-स्वास्थ्य, पर्यावरण, खेती-किसानी, हिंसक जीवों के हमलों, आपदा समेत तमाम ज्वलंत विषयों पर भी प्रखरता से बात हुई। सम्मेलन के अलग-अलग सत्रों में अन्य वक्ताओं के साथ ही भाजपा के फायरब्रांड विधायक विनोद चमोली और मुन्ना सिंह चौहान भी तीखे तेवरों के साथ आंदोलनकारियों के सुर में गरजे।
मूसलाधार बारिश भी न रोक पाई कदम, राज्य आंदोलनकारी मंच के दो दिवसीय सम्मेलन में खचाखच भरा रहा टाऊनहॉल
देहरादून में शनिवार रात से ही अनवरत मूसलाधार बारिश चल रही थी। रविवार पूरे दिन बारिश की तीव्रता जारी रही। सिर्फ दूनघाटी ही नहीं, प्रदेशभर में यही स्थिति बनी थी। बावजूद इसके, दूर-दराज पहाड़ों से लेकर देहरादून जिले के विभिन्न शहरों-कस्बों और गांवों से भी बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी सुबह से ही नगर निगम परिसर में जुटने लगे थे। पूर्वाह्न राज्य आंदोलनकारियों से खचाखच भरे निगम के लाला जुगमंदर दास प्रेक्षागृह में सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन हुआ। ऋषिकेश से आईं आंदोलनकारी लक्ष्मी बुडाकोटी के मांगल गायन के बीच समाज कल्याण मंत्री खजान दास, पिछड़ा वर्ग कल्याण परिषद के उपाध्यक्ष अशोक वर्मा, राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष हुकम सिंह, उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल, सरोज कोठारी व आंदोलनकारी मंच के अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी ने दीप प्रज्वलित किया।
प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन नेगी ने प्रस्तुत किया आंदोलनकारियों की मांगों और समस्याओं पर ज्ञापन
उद्घाटन सत्र की औपचारिक शुरूआत आंदोलनकारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन नेगी के संबोधन के साथ हुई। उन्होंने राज्य आंदोलनकारियों के चिह्नीकरण और प्रवर समिति की रिपोर्ट के बाद विधानसभा से पारित आंदोलनकारियों व उनके आश्रितों के लिए 10 फीसद क्षैतिज आरक्षण संबंधी मामलों में अफसरशाही के अडंगा लगाने पर रोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पिछले साल 8 नवंबर को राज्य आंदोलनकारियों के लिए जो भी घोषणाएं कीं, अधिकारी उन पर पलीता लगा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन पढ़कर सुनाया।
विधायक-मंत्री-मुख्यमंत्री जो भी हैं, सब आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदानों की बदौलत : खजान दास
सम्मेलन में मंत्री खजान दास ने कहा कि सरकार चाहे किसी की भी हो, वह आंदोलनकारियों की अनदेखी नहीं कर सकती। क्योंकि, उत्तराखंड में चाहे पहले हों या आज, जो भी विधायक, मंत्री या मुख्यमंत्री बने हैं, सभी आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदानों के फलस्वरूप ही बने हैं। अगर ये राज्य न बना होता, तो कोई कुछ न होता। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों की जो भी मांगें और मुद्दे हैं, उन्हें हर हाल में पूरा कराया जाएगा।
विधायक विनोद चमोली बोले- आंदोलनकारी याचना नहीं आदेश करेगा, सरकार किसी की भी हो उसे सुनना पड़ेगा, पलायन पर आईना भी दिखाया
भाजपा विधायक विनोद चमोली ने इस मौके पर कहा कि उत्तराखंड अभी बनना बाकी है। इसमें हमारी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि हमने इसे बनाया है, तो आगे बढ़ाना भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हम देहरादून और हल्द्वानी में बैठकर पलायन की बहुत बात करते हैं, लेकिन वहां जाने को तैयार नहीं होते। हम देहरादून में करोड़ों का मकान बनाते हैं, लेकिन लाख-दो लाख रूपये अपने गांव के मकान को ठीक करने के लिए खर्च नहीं करते। हमें वहां अपने घर ठीक करने होंगे, ताकि जब-तब जाया जा सके। यहां बैठकर हम कोसते हैं कि बाहर के लोग आ रहे। जब हम नहीं जाएंगे, तो कोई तो जाएगा। हमें अपने और बच्चों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, हमने आंदोलनकारी के तौर पर पहाड़ की जिम्मेदारी ली है, तो उसे निभाएं भी। चमोली ने कहा कि राज्य आंदोलनकारी याचना नहीं करेगा, वह आदेश करेगा। चाहे किसी की भी सरकार हो, उसे आंदोलनकारियों को सुनना पड़ेगा, उनकी मांगों को पूरा करना पड़ेगा, उनकी बातों को मानना पड़ेगा। प्रवर समिति से उन्होंने जो विधेयक पास करके विधानसभा से पारित कराया उसमें 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान सभी चिह्नित आंदोलनकारियों के लिए था, जिनमें कर्मचारी भी शामिल हैं। लेकिन, अधिकारियों ने उसे अपने हिसाब से परिभाषित करते हुए कर्मचारियों को अलग किया है, जो पूरी तरह गलत है। इसका समाधान कराया जाएगा। इस सत्र में राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के पदाधिकारियों और पिछड़ा वर्ग परिषद के उपाध्यक्ष ने भी संबोधन किया। विधायक चमोली के आग्रह पर कवि डॉ. अतुल शर्मा ने राज्य आंदोलन के दौर का अपना लोकप्रिय गीत, ‘लड़ के लेंगे-भिड़ के लेंगे- छीन के लेंगे उत्तराखंड…’ प्रस्तुत किया।
विधायक मुन्ना सिंह चौहान का सीड्स इकोनॉमी, पहाड़ों में सरकारी बोर्डिंग स्कूल और सेंट्रल हेल्थ फैसिलिटी पर जोर
दोपहर बाद से शाम तक चले दूसरे सत्र में ‘उत्तराखंड राज्य के विकास में भौगोलिक चुनौतियां और समाधान’ विषय पर विमर्ष हुआ। इस सत्र में बतौर मुख्य वक्ता विकासनगर के भाजपा विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने शिक्षा-स्वास्थ्य, कृषि, संस्कृति, आर्थिकी समेत विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से बात रखी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य इसलिए मांगा गया था, क्योंकि मैदान पर लागू होने वाली नीतियां और विकास के मानक यहां पहाड़ी अंचल में फिट नहीं बैठते थे। आज भी आवश्यकता यही है कि राज्य के हर क्षेत्र, यहां तक कि हर घाटी की विशिष्टताओं का ध्यान रखते हुए प्लानिंग हो।
उन्होंने सरकारी स्कूलों के प्रति लोगों का रूझान बढ़ाने के लिए पहाड़ी क्षेत्रों में सरकारी स्कूनों को मर्ज करके उनके स्थान पर सरकारी बोर्डिंग स्कूलों की स्थापना की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पहाड़ी खेती लाभदायक नहीं होती, यह सिर्फ बहाना है। उत्तराखंड के पहाड़ों पर ही कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां खेती संपन्नता का आधार बनी हुई है। कलस्टर आधारित खेती पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में सीड्स इकोनॉमी (बीज आधारित आर्थिकी) और स्वाभाविक प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए उन्होंने सेंट्रल हेल्थ फैसिलिटी 50-100 गांवों को केंद्र में रखते हुए बनाने पर जोर दिया। विधायक चौहान से हॉल में मौजूद आंदोलनकारियों ने तीखे सवाल भी पूछे, जिनका उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया।
मेयर सौरभ थपलियाल ने राजधानी समेत प्रदेश में तेजी से हो रहे डेमोग्राफिक बदलाव पर जताई गंभीर चिंता
इस सत्र में देहरादून के मेयर सौरभ थपलियाल ने राजधानी समेत प्रदेश में तेजी हो रहे डेमोग्राफिक बदलाव पर चिंता जताते हुए कहा कि देहरादून में ठेलियों की बाढ़ और जमीनों पर अवैध कब्जे करके बसने की प्रवृत्ति इसी का एक हिस्सा है, जिसे रोका जाना बहुत जरूरी है। उन्होंने आंदोलनकारियों को गृह कर में छूट देने और नगर निगम की ओर से थानो रोड पर विकसित की जा रही दुकानों के आवंटन में प्राथमिकता देने की घोषणा की। वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता समर भंडारी, उत्तराखंड कांग्रेस की घोषणा-पत्र समिति के संयोजक डॉ. प्रेम बहुखंडी, नरेंद्र नगर के पूर्व विधायक ओम गोपाल रावत, पूर्व कर्मचारी नेता दिनेश भंडारी, रामनगर से आए उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी, कर्मचारी नेता भानु रावत, वरिष्ठ अधिवक्ता पृथ्वी सिंह नेगी, पत्रकार जितेंद्र अंथवाल, राज्य आंदोलनकारी जयदीप सकलानी ने भी इस सत्र में विचार व्यक्त किए। संचालन अलग-अलग सत्रों में मंच के अध्यक्ष नेगी के साथ ही प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती व महासचिव रामलाल खंडूरी किया।
इससे पूर्व बालिकाओं और महिलाओं ने उत्तराखंड लोक संस्कृति पर आधारित गीत भी प्रस्तुत किए। सम्मेलन में टिहरी से डॉ. राकेश भूषण गोदियाल, नरेंद्र राणा, देवेंद्र नौडियाल, मसूरी से जयप्रकाश उत्तराखंडी, देवी गोदियाल, पत्रकार शूरवीर भंडारी, कमल भंडारी, द्विजेंद्र बहुगुणा, अनिल गोदियाल, पत्रकार शूरवीर भंडारी ऋषिकेश से डीएस गुसाईं, द्वारिका बिष्ट, केके बिजल्वाण, उमादत्त जुगरान, वरिष्ठ आंदोलनकारी नेता सुरेंद्र कुमार, केशव उनियाल, मोहन खत्री, सुरेश नेगी, चंद्रकिरण राणा, संजय पुंडीर, धर्मपाल सिंह रावत, ओमप्रकाश सती, कुलदीप कोहली, जीतमणि पैन्यूली, गणेश डंगवाल, ध्यानपाल बिष्ट, सुलोचना भट्ट, पुष्पलाता सिलमाना, अरुणा थपलियाल, विजयलक्ष्मी गुसांईं, मोहम्मद शाहिद, रघुवीर सिंह तोमर, राजेश पांथरी, सुदेश सिंह, सुशील चमोली, मनोज नौटियाल, मोहन थापा, मनोज जायड़ा, सत्येंद्र भंडारी, महेंद्र रावत बब्बी, मोहन सिंह रावत, सुरेश कुमार, सुलोचना भट्ट, सत्या पोखरियाल, भुवन जोशी, नरेश भट्ट, नरेंद्र नौटियाल आदि भी मौजूद रहे।

