भू-कानून उल्लंघन के 14 और मामलों में डीएम की कार्रवाई, 304 नाली भूमि सरकार में निहित करने के आदेश
नैनीताल। जिले में भू-कानून के उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई तेज कर दी गई है। डीएम ललित मोहन रयाल की कराई जांच में 14 और ऐसे मामले पकड़ में आए, जिनमें भू-कानून को तक पर रख दिया गया। डीएम रयाल ने इन 14 मामलों में कुल 6.088 हेक्टेयर (लगभग 304 नाली) भूमि राज्य सरकार में निहित करने के आदेश दिए हैं।
बागवानी और कृषि के नाम पर खरीदी जमीन, संचालित कर रहे थे व्यावसायिक गतिविधियां
मामलों की सुनवाई के दौरान डीएम ने पाया कि जिले में विभिन्न प्रकार से भू-कानून का उल्लंघन किया गया है। जांच में ऐसे मामले सामने आए, जिनमें बागवानी के उद्देश्य से खरीदी गई भूमि का निर्धारित प्रयोजन के लिए उपयोग ही नहीं किया गया। कुछ मामलों में एक ही परिवार ने अलग-अलग सदस्यों के नाम पर नियमों के विपरीत निर्धारित सीमा से अधिक भूमि खरीदी। वहीं, कृषि प्रयोजन के लिए आवंटित भूमि पर खेती के बजाय व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती मिलीं।
एससी वर्ग की भूमि सामान्य वर्ग को बेची, आवासीय प्रयोजन में स्वीकृत भूमि का भी व्यावसायिक उपयोग
इतना ही नहीं, कुछ मामलों में अनुसूचित जाति (एससी) की भूमि का नियमों के विपरीत सामान्य वर्ग के व्यक्तियों को बेचा जाना और आवासीय प्रयोजन के लिए स्वीकृत भूमि का व्यावसायिक उपयोग पाया गया। डीएम ने इन सभी मामलों में भू-कानून का खुला उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित भूमि को राज्य सरकार में निहित करने की कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि भविष्य में इन भूमि का उपयोग जनहित व सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि डीएम ने बीते 5 अगस्त को भी भू-कानून के उल्लंघन के एक मामले में हरियाणा निवासी दंपति की ग्राम सतबूंगा में स्थित 250 वर्ग मीटर भूमि राज्य सरकार में निहित करा दी थी। डीएम रयाल ने स्पष्ट किया कि भू-कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
राज्य बनने के बाद से बाहरी व्यक्तियों की सभी संदिग्ध भूमि खरीद की उच्चस्तरीय जांच कराए सरकार : लूशुन
वहीं दूसरी ओर, उत्तराखंड क्रांति दल के मूल निवास भू-कानून प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष लूशुन टोडरिया ने भू-कानून के उल्लंघन के मामले सामने आने पर राज्य सरकार के दावों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि नैनीताल में भू-कानून के उल्लंघन के मामलों में भूमि सरकार में निहित करने के डीएम ललित मोहन रयाल के आदेश यह साबित करते हैं कि राज्य में भू-कानून के उल्लंघन के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। यदि शिकायत के बाद कार्रवाई संभव है, तो यह भी स्पष्ट है कि व्यवस्था में ऐसी खामियां मौजूद हैं, जिनके कारण नियमों के विपरीत भूमि क्रय-विक्रय हो पा रही है। तोडरिया ने कहा कि राज्य सरकार जिस भू-कानून को ऐतिहासिक और प्रभावी बताकर प्रचारित कर रही है, उसकी वास्तविकता लगातार आ रहे ऐसे मामलों से उजागर हो रही है। सवाल यह है कि यदि प्रारंभिक स्तर पर ही जांच और सत्यापन की व्यवस्था प्रभावी होती, तो नियमों के विरुद्ध भूमि खरीद की नौबत ही क्यों आती? टोडरिया ने मांग की कि राज्य बनने के बाद से अब तक बाहरी व्यक्तियों की सभी संदिग्ध भूमि खरीद की उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिन मामलों में भू-कानून या अन्य प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है, उनमें कठोर कार्रवाई की जाए।

