कोयले से बनी बिजली…राख से बना पहाड़…पहाड़ पर एनटीपीसी ने उगा दिया घना जंगल
कोरबा (छत्तीसगढ़)। राख का पहाड़ और इस पहाड़ पर घना जंगल…। यह सुनना और देखना पहली बार में अविश्वसनीय लग सकता है। पर, है एकदम सच। ऐसा सच, जो आश्चर्यचकित करता है। इतना ही नहीं, जो आईना दिखा रहा है पर्यावरण संरक्षण के नाम पर हर साल धरातल के बजाय फाइलों में लाखों पेड़ उगाने वाले सिस्टम को। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में यह अनोखी पहल की है नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) कोरबा ने। एनटीपीसी ने छत्तीसगढ़ के कोरबा में न केवल कोयले से बिजली उत्पादन के बाद उत्पन्न होने वाली लाखों टन राख की समस्या का निदान किया है, अपितु उसी राख के ढेर पर लाखों वृक्षों वाला हराभरा घना जंगल भी खड़ा कर दिया।
पीआईबी देहरादून की ओर से आयोजित अध्ययन भ्रमण पर उत्तराखंड का 13 सदस्यीय मीडिया दल इन दिनों छत्तीसगढ़ में है। वहीं, पीआईबी भुवनेश्नर की ओर से उड़ीसा का मीडिया दल भी साथ चल रहा है। दोनों मीडिया दल छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अलावा बिलासपुर और कोरबा जिलों में भी केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों का अवलोकन कर रहा है। इसी के अंतर्गत भ्रमण के तीसरे दिन कोरबा स्थित एनटीपीसी थर्मल पावर प्लांट में हो रहे विद्युत उत्पादन और वहां उत्पन्न होने वाली राख के विभिन्न उपयोगों की जानकारी ली। कोरबा प्लांट क्षेत्र में एनटीपीसी की हरित पहल मीडिया दल के लिए आकर्षण का केंद्र रही। अधिकारियों ने बताया कि कोयला आधारित बिजली उत्पादन से निकलने वाली राख के उपयोग और पुनर्वास पर विशेष काम किया जा रहा है।
एनटीपीसी का लक्ष्य 2037 तक 150 और 2047 तक 240 गीगावाट विद्युत उत्पादन : पात्रा
एनटीपीसी के कार्यकारी निदेशक केसी पात्रा ने बताया कि वर्तमान में एनटीपीसी की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता करीब 91 गीगावाट है। इसे वर्ष 2037 तक 150 गीगावाट और देश की आजादी के शताब्दी वर्ष 2047 तक 240 गीगावाट तक पहुंचाने की योजना है। कोरबा प्लांट की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि 2,600 मेगावाट क्षमता वाले संयंत्र ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 87.71 प्रतिशत प्लांट लोड फैक्टर दर्ज किया। यह एनटीपीसी के सभी स्टेशनों में लगातार छठे वर्ष सर्वाधिक पीएलएफ रहा। पीएलएफ से पता चलता है कि कोई बिजली संयंत्र अपनी स्थापित क्षमता का कितने प्रभावी ढंग से उपयोग कर रहा है। इसी अवधि में कोरबा ने 94.85 प्रतिशत घोषित क्षमता और 95.33 प्रतिशत ऑन-बार उपलब्धता भी दर्ज की। संयंत्र की निरंतर संचालन क्षमता भी उल्लेखनीय रही। उन्होंने बताया कि एनटीपीसी कोरबा की यूनिट-7 ने 455 दिन लगातार संचालन किया, जबकि यूनिट-1 ने 495 दिन लगातार संचालन का रिकॉर्ड बनाया। कोरबा की स्टेज-1 की तीनों इकाइयां एनटीपीसी की सबसे लंबे समय तक लगातार संचालित इकाइयों में शामिल हैं।
पूरे 900 एकड़ क्षेत्र में राख के पहाड़ पर साल, शीशम, नीम- शहतूत के 4.5 लाख पेड़ों का जंगल: शशि शेखर
वहीं, एनटीपीसी कोरबा ने चारपारा ऐश डाइक के पुनर्वासित क्षेत्र में 4.5 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं, जिससे यह क्षेत्र हरित क्षेत्र में तब्दील हो गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कोरबा ने 60.71 लाख मीट्रिक टन राख का उपयोग किया। एनटीपीसी के एचआर हेड शशि शेखर ने बताया कि कोयले के इस्तेमाल से निकलने वाली राख का निस्तारण पर्यावरणीय व अन्य पहलुओं से काफी बड़ी चुनौती है। इसे देखते हुए एनटीपीसी कोरबा ने साल-2007 से वनीकरण शुरू किया। करीब 900 एकड़ बेस वाले राख के ढेर की पांच लेयर बनी, जिनकी ऊपरी ऊंचाई 30 मीटर है। ऊपरी हिस्सा करीब 500 एकड़ का है। उन्होंने बताया कि इस कृत्रिम पहाड़ी पर 4.5 लाख पौधे रोप गए, जो आज साल, शीशम, नीम, शहतूत समेत विभिन्न प्रजातियों के वृक्षों के विशाल घने जंगल में तब्दील हो चुके हैं। कई तरह के वन्यजीव भी इस जंगल का हिस्सा बन चुके हैं। पेड़ों पर क्यूआर कोड लगाए गए हैं, जिससे उनके बारे में विस्तृत जानकारी मिलती है। उन्होंने बताया कि राख से ईंट और रोड़ी बनाने की दिशा में भी कार्य चल रहा है।
इस दौरान पीआईबी देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुंदरियाल ने कहा कि मीडिया एक्सपोजर टूर के माध्यम से उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए ऊर्जा उत्पादन के साथ सुरक्षा और पर्यावरण प्रबंधन की तकनीकों को समझना महत्वपूर्ण है। भ्रमण के दौरान महाप्रबंधक एस. बेहरा मौजूद रहे ।
उत्तराखंड और उड़ीसा के पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने बाल्को का भी किया दौरा
मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (बाल्को) का भी दौरा किया। पत्रकारों ने सामुदायिक विकास पहल के अंतर्गत संचालित वेदांता स्किल स्कूल में उपलब्ध प्रशिक्षण व्यवस्था व युवाओं को रोजगारोन्मुखी कौशल प्रदान करने की प्रक्रिया को करीब से समझा। अधिकारियों ने बताया कि वेदांता स्किल स्कूल के तीन केंद्रों पर सात एनएसडीसी प्रमाणित ट्रेड में प्रशिक्षण की व्यवस्था है। पिछले 15 सालों में यहां लगभग 14,000 से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया गया है और 75 से अधिक प्लेसमेंट संस्थाओं के माध्यम से रोजगार के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया गया।
भ्रमण के दौरान पत्रकारों ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं से संवाद किया और उनके अनुभवों एवं कौशल विकास से जुड़े अवसरों के बारे में जानकारी ली।पत्रकारों से भेंट के दौरान बाल्को के प्रशासन प्रमुख धनंजय मिश्रा ने कहा कि कंपनी अपने विकास के महत्वपूर्ण पड़ाव पर है और 10 लाख टन प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता की दिशा में अग्रसर है।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र की आधारभूत संरचना, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक विकास के लिए बाल्को सड़क निर्माण व चौड़ीकरण, इलेक्ट्रिक वाहन, ऊर्जा संरक्षण, जल संरक्षण, पौधारोपण, सामुदायिक भवन, जुबली पार्क नवीनीकरण, सोलर लाइट व विद्यालय विकास जैसे कार्य कर रहा है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में मोबाइल हेल्थ वैन और 125 बिस्तरों वाला बाल्को अस्पताल सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
फरवरी-मार्च तक अपना आईपीओ लाएगा एसईसीएल, कोयले के ढुलान के लिए रोड ट्रांसपोर्ट पर निर्भरता करेगा कम : बिरंची दास
इससे पहले सुबह बिलासपुर स्थित साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (एसईसीएल) के मुख्यालय में संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। संवाद में एसईसीएल के निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास ने कंपनी की उपलब्धियां और आगे की योजनाएं साझा किए। उन्होंने बताया कि कंपनी अगले फरवरी-मार्च तक अपने आईपीओ लाएगी। कोयले के ढुलान के लिए रोड ट्रांसपोर्ट पर निर्भरता कम करते हुए रेलवे के ज्यादा इस्तेमाल की दिशा में भी काम हो रहा है। कोरबा में कोयला खदानों के चारों ओर रिंग रोड के निर्माण में भी एसईसीएल योगदान देने जा रही है। इस अवसर पर निदेशक (तकनीकी–संचालन) रमेश चंद्र महापात्र, निदेशक (तकनीकी– योजना एवं परियोजना) नृपेंद्र नाथ भी उपस्थित रहे।

