गुलदार समेत वन्यजीवों के हमलों से बच्चों उत्पन्न संकट का बाल आयोग ने लिया संज्ञान
नैनीताल। वन्यजीवों, खासकर गुलदार के हमलों से बच्चों की सुरक्षा के लिए उत्पन्न संकट का उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने वन विभाग को बच्चों की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में प्रभावी व ठोस सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग सदस्य ने वन विभाग को प्रभावी सुरक्षात्मक उपाय करने के दिए निर्देश
यहां जीबी पंत उच्चस्थलीय प्राणी उद्यान में आयोग के सदस्य योगेश रजवार ने नैनीताल जिले में वन्यजीवों के हमले की घटनाओं के संबंध में वन विभाग के अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में आयोग सदस्य रजवार ने वन्यजीवों के बढ़ते हमलों से उत्पन्न चुनौतियों के बीच स्थानीय नागरिकों, विशेषकर स्कूल आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के आसपास वन्यजीवों की आवाजाही वाले संवेदनशील स्थानों को चिह्नित करके वहां सोलर लाइट लगाने, आवश्यक स्थानों पर फेंसिंग करने और स्कूल तक आने-जाने वाले मार्गों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
आयोग सदस्य ने नैनीताल व आसपास के क्षेत्रों में बंदरों की बढ़ती समस्या के समाधान के लिए वानर बंध्याकरण कार्यक्रम को प्रभावी योजनाबद्ध अभियान के रूप में संचालित करने पर जोर दिया, जिससे आमजन को इस समस्या से स्थायी राहत मिल सके। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाकर ग्रामीणों व स्कूली बच्चों को वन्यजीवों के व्यवहार, उनसे सुरक्षित दूरी बनाए रखने, वन्यजीवों की उपस्थिति की स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों और आपात स्थिति में वन विभाग को तत्काल सूचना देने के संबंध में जागरूक करने को कहा।
बैठक में नैनीताल वन प्रभाग के उप वन संरक्षक आकाश गंगवार, मुक्तेश्वर की उप प्रभागीय वनाधिकारी ममता चंद, नैनीताल की उप प्रभागीय वनाधिकारी शशि देव, मनोरा वन क्षेत्र के क्षेत्राधिकारी नितिन पंत, भवाली वन क्षेत्र के क्षेत्राधिकारी विजय मेलकानी समेत कई अधिकारी शामिल हुए।

