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भानियावाला-ऋषिकेश रोड प्रोजेक्ट : भारी हंगामे और प्रदर्शन के बीच बेनतीजा रही सरकार व एनएचएआई की बुलाई बैठक

देहरादून। प्रदेश सरकार व भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से संयुक्त रूप से आयोजित हितधारक परामर्श बैठक भारी हंगामें की भेंट चढ़ गई। बैठक में बिना किसी ठोस विकल्प के पहुंचे अफसर पर्यावरणसेवियों और नागरिकों के सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, तो सभागार में मौजूद युवाओं ने नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।

महज रस्मअदायगी साबित हुई इस बैठक में आयोजक अधिकारियों की ओर से मीडिया के प्रवेश पर यह कहते हुए रोक लगाई गई थी कि बैठक की जानकारी बाद में पीआईबी (प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो) के माध्यम से दी जाएगी। जिस बैठक में लोगों को अखबारों में मोटे विज्ञापन देकर आमंत्रित किया गया, उसी सार्वजनिक बैठक से मीडिया को दूर रखने के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई।  हालांकि, बैठक में मौजूद कई सोशल एक्टिविस्ट की आपत्ति के बाद अधिकारियों को यह प्रतिबंध वापस लेना पड़ा।

सात मोड़ के जंगलों में दशकों पुराने सैकड़ों हरे-पेड़ों के ‘सामूहिक हत्याकांड’ से विवादों में घिरी परियोजना

सात मोड़ के जंगलों के व्यापक विनाश के कारण विवादों में घिरी एनएचएआई की भानियावाला-ऋषिकेश मार्ग परियोजना के संबंध में वन व वनस्पति से संबंधित विषयों पर वीरवार को हितधारक परामर्श बैठक आहूत की गई थी। पर्यावरण संरक्षण की सरकारी रस्मअदायगी वाले ‘हरेला माह’ (जुलाई) में इस प्रस्तावित कॉरिडोर के सात मोड़ वाले घने वन व वन्यजीव वाले क्षेत्र में पड़े पैमाने पर दशकों पुराने हरे-भरे पेड़ों का ‘कत्लेआम’ एनएचएआई का रास्ता साफ करने के लिए उसके कहने पर उत्तराखंड के जंगल महकमे ने शुरू किया।

कुछ ही दिन के भीतर सैकड़ों पेड़ों को जड़ से साफ कर दिया गया। सरकारी स्तर से हो रहे पेड़ों के इस ‘सामूहिक हत्याकांड’ के खिलाफ देहरादून, ऋषिकेश समेत देश के कई हिस्सों से आवाज उठी। आक्रोषित लोगों ने सोशल मीडिया से सड़क तक जोरदार विरोध दर्ज कराया और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया और सड़क की इस आवाज को संसद में उठाने का आश्वासन दिया, तो प्रदेश सरकार को भी ‘पर्यावरण क्षति’ की चिंता हुई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फिलहाल पेड़ कटान पर रोक लगाते हुए अधिकारियों को इस संबंध में लोगों से व्यापक विमर्ष करने के निर्देश दिए।। इसी कड़ी में प्रदेश सरकार और एनएचएआई ने संयुक्त रूप से वीरवार को बैठक आहूत की।

हितधारक बैठक में पर्यावरणसेवियों की दो टूक, हम विकास के विरोधी नहीं, पर जंगल का कत्लेआम बिल्कुल स्वीकार्य नहीं

अपराह्न 3 बजे से लैंसडाउन चौक स्थित दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर के सभागार में यह बैठक आहूत की गई थी। तय समय से पहले ही काफी संख्या में पर्यावरणसेवी, सोशल एक्टिविस्ट व देहरादून और ़ऋषिकेश के काफी लोग भी सभागार में पहुंच गए थे। हरियाली बचाने की मुहिम में लगातार सक्रिय देहरादून सिटीजंस फोरम और सिटीजंस फॉर ग्रीन दून के कार्यकर्ता भी अपना पक्ष रखने पहुंचे। निर्धारित समय के करीब 15-20 मिनट बाद तक भी लोगों से खचाखच भरे सभागार में जब आयोजक अधिकारी नदारद मिले, तो लोगों ने नाराजगी जाहिर की। इसके कुछ देर बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे और बैठक शुरू हुई। बैठक में लोगों ने दो टूक शब्दों में दोहराया कि सड़क प्रोजेक्ट अगर जंगल के कत्लेआम की कीमत पर होगा, तो इसे किसी भी दशा में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सड़क निर्माण या विकास कार्यों के विरोधी कतई नहीं हैं, लेकिन इसके लिए अब कहीं भी पेड़ों की हत्या नहीं होने देंगे।

सात मोड़ पर ट्रैफिक दबाव और जाम जैसे दावों को बताया कोरी ‘बकवास’, फोरम की ओर से सौंपा गया 15 सूत्रीय पत्र

देहरादून सिटीजंस फोरम के संस्थापक सदस्य व एसडीसी फाउंडेषन के प्रमुख अनूप नौटियाल ने 15 सूत्रीय पत्र अधिकारियों को सौंपा, जिसमें मांग, सुझाव और विकल्प पर बात की गई है। फोरम की इरा चौहान, सिटीजंस फॉर ग्रीन दून के हिमांशु अरोड़ा समेत ऋषिकेश और दून के कई पर्यावरणसेवियों व युवाओं ने साफ शब्दों में कहा कि एनएचएआई के पेड़ ट्रांसप्लांट या काटे गए पेड़ों के एवज में नए पौधरोपण जैसे ‘लॉलीपॉप’ के झांसे में कोई नहीं आएगा। एनएचएआई यदि सड़क चौड़ा भी करना चाहता है, तो ऐसा विकल्प दे, जिसमें एक भी पेड़ काटने की आवश्यकता ही न हो। उन्होंने एनएचएआई व अन्य सरकारी एजेंसियों के इन दावों को भी कोरी ‘बकवास’ करार दिया, जिनमें कहा जा रहा है कि सात मोड़-ऋषिकेश रोड पर वाहनों का दबाव बढ़ने से जाम लगता है।

सवालों के नहीं मिले संतोषजनक जवाब तो सभागार में ही एनएचएआई विरोधी नारेबाजी के साथ शुरू हो गया प्रदर्शन

बैठक में लोगों ने एनएचएआई व शासन के अधिकारियों से कई सवाल किए, लेकिन अधिकारियों के पास उनके सवालों का कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। इसी दौरान ऋषिकेश व से आए पर्यावरणसेवियों और युवाओं ने सभागार में एनएचएआई के विरूद्ध जोरदार नारेबाजी के साथ प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस पर अधिकारी भी वहां से निकल गए और बैठक बेनतीजा रही। बैठक में प्रदेश सरकार की ओर से लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. पंकज पांडेय, सचिव सी. रविशंकर, एनएचएआई की ओर से परियोजना निदेशक सौरभ सिंह के साथ ही अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

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