जिलाधिकारियों ने ठंडे बस्ते में डाली चिह्नीकरण प्रक्रिया, आंदोलनकारियों में बढ़ी नाराजगी
देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के चिह्नीकरण के प्रति जिलाधिकारियों के स्तर से बरती जा रही उदासीनता से नाराजगी बढ़ रही है। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच ने इसके लिए शासन को जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई की मांग की है। मंच इसी माह राज्य आंदोलनकारियों का प्रदेशस्तरीय सम्मेलन भी आयोजित करेगा, जिसमें मुख्यमंत्री को बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित किया गया है।
आंदोलनकारी नेता बोले, मुख्यमंत्री की घोषणा को पलीता लगा रहे अधिकारी
मंच की अगुआई में रविवार को यहां कलेक्ट्रेट स्थित शहीद स्मारक सभागार में राज्य आंदोलनकारियों की बैठक हुई। इसमें दो विषयों पर गहन चर्चा हुई। ये विषय थे- राज्य आंदोलनकारियों की चिह्निकरण प्रक्रिया में हो रही देरी और इसी माह के अंत में राज्य आंदोलनकारियों के प्रस्तावित प्रदेशस्तरीय सम्मेलन की तैयारी। वयोवृद्ध राज्य आंदोलनकारी पुष्पलता सिल्माणा की अध्यक्षता और पूरण सिंह लिंगवाल के संचालन में हुई बैठक में मंच के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती व राधा तिवारी ने कहा कि शासन की हीला-हवाली के चलते किसी भी जिले में डीएम चिह्निकरण प्रक्रिया में कोई पहल नहीं कर रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले साल राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर चिह्नीकरण संबंधी जो घोषणा की थी, उसे अधिकारी पलीता लगा रहे हैं। इस रवैये को अब बर्दास्त नहीं किया जाएगा।
इसी माह होगा राज्य आंदोलनकारियों का प्रदेषस्तरीय सम्मेलन, महत्वपूर्ण मुद्दों पर होगी सत्रवार चर्चा : नेगी
मंच के अध्यक्ष नेगी ने कहा कि इसी माह के अंत में उत्तराखंड आंदोलनकारियों का प्रदेशस्तरीय सम्मेलन आयोजित होना है, जिसमें मुख्यमंत्री धामी बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे। उन्होंने मंच से जुड़े सभी आंदोलनकारियों का आह्वान किया कि वे सम्मेलन को ऐतिहासिक बनाने के लिए जुट जाएं। उन्होंने कहा कि राज्य के महत्वपूर्ण मुद्दों व राज्य आंदोलनकारियों के मुद्दों पर सम्मेलन में सत्रवार चर्चा होगी।
सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सभी जगह आंदोलनकारियों से साधा जा रहा संपर्क, जल्द होगी तैयारी बैठक : खंडूड़ी
मंच के प्रदेश महामंत्री रामलाल खंडूड़ी ने इस मौके पर जानकारी दी कि सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सभी जगह संपर्क साधा जा रहा है। जल्द ही मंच के पदाधिकारियों की तैयारी बैठक भी आयोजित की जाएगी। बैठक में मंच के सदस्य राजेंद्र बहुगुणा, सुभागा फर्स्वाण व युद्धवीर चौहान ने कहा कि नौ माह का समय बीतने के बाद भी प्रदेश में अधिकारियों की कार्यशैली और ढीलेपन के कारण राज्य आंदोलनकारियों का चिह्नीकरण नहीं किया जा रहा है। उनकी उपेक्षा की जा रही है, जिससे शहीदों के परिजनों के साथ ही तमाम राज्य आंदोलनकारियों में रोष व्याप्त है, जो कभी भी बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
बैठक में सुरेंद्र रावत, विश्वंभर दत्त बौंठियाल, भरत सिंह पडियार, सुरेश नेगी, रतन अमोली, मोहन खत्री, गणेश डंगवाल, चंद्र किरण राणा, ललित जोशी, प्रताप पंवार, सुरेश नेगी, मोहन थापा, सुशील चमोली, सुनील नौगांई, मनोज नौटियाल, यशोदा रावत, द्वारिका बिष्ट, सुशीला चंदोला, राजेश्वरी नेगी, हरी सिंह महर, क्रांति अभिषेक बिष्ट, विनोद असवाल, पुष्पा रावत, सावित्री पंवार, सुधीर नारायण शर्मा, सुशील विरमानी, पुष्पा नेगी, दुर्गा ध्यानी, सुमति पडियार समेत काफी आंदोलनकारी शामिल हुए।

