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राज्य आंदोलनकारियों के आरक्षण संबंधी विधेयक के प्रारूप को प्रवर समिति ने दिया अंतिम रूप

देहरादून। विधानसभा की प्रवर समिति ने उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों को राजकीय सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने संबंधी विधेयक के प्रारूप को लगभग अंतिम रूप दे दिया है। संसदीय कार्यमंत्री व प्रवर समिति के अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने फाइनल ड्राफ्ट के एडॉप्शन (सदस्यों के हस्ताक्षर) के लिए 3 नवंबर को समिति की अंतिम बैठक बुलाई है।

राज्य आंदोलनकारियों व उनके आश्रितों को राजकीय सेवाओं में 10 फीसद क्षैतिज आरक्षण देने संबंधी मामला पिछले कई वर्षों से लंबित है। मौजूदा सरकार इस मामले को पुनः विधानसभा में लेकर आई, लेकिन विधेयक के प्रारूप को पूरी तरह त्रुटिहीन बनाने के लिए इसे प्रवर समिति को सौंप दिया गया। पिछले सप्ताह समिति की बैठक लंबे समय के लिए टाले जाने संबंधी चर्चाओं के बीच उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। आंदोलनकारियों के असंतोष को देखते हुए समिति के अध्यक्ष ने मंगलवार को बैठक आहूत की। 

एडॉप्शन के लिए 3 नवंबर को होगी अंतिम बैठक, विधानसभा अध्यक्ष को सौंपेंगे ड्राफ्ट: अग्रवाल

दोपहर 1ः30 बजे से विधानसभा स्थित कक्ष सं.-120 में  अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल की अध्यक्षता में प्रवर समिति की बैठक हुई। इसमें समिति के सदस्य व भाजपा विधायक विनोद चमोली, मुन्ना सिंह चौहान और उमेश शर्मा काऊ के साथ ही कांग्रेस विधायक भुवन कापड़ी बैठक में मौजूद रहे। बैठक के बाद अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने बताया कि प्रवर समिति ने व्यापक विचार मंथन के बाद ड्राफ्ट को अंतिम रूप लगभग दे दिया है। अब 3 नवंबर को इसके एडॉप्शन (अंगीकृत करने) के लिए अंतिम बैठक होगी। इसके बाद ड्राफ्ट विधानसभा अध्यक्ष को सौंप कर प्रवर समिति का काम खत्म हो जाएगा।  

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