उत्तराखंड की 18वीं मुख्य सचिव बनने वाली ‘पहली महिला’ अधिकारी राधा रतूड़ी के नाम हैं कई उपलब्धियां
देहरादून। वरिष्ठतम आईएएस उत्तराखंड की नई मुख्य सचिव होंगी। वे सेवा विस्तार पर चल रहे मौजूदा मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधू की बुधवार (31 जनवरी) को सेवानिवृत्ति के साथ ही यह दायित्व संभाल लेंगी। 18वीं मुख्य सचिव बनने के साथ ही वे ऐसी पहली महिला अधिकारी हैं, जो नौकरशाही के इस शीर्ष पद पर पहुंची हैं।
1988 बैच की आईएएस राधा रतूड़ी वर्तमान में अपर मुख्य सचिव हैं। बताया जा रहा है कि संधू को और सेवा विस्तार देने के बजाय उनके स्थान पर राधा रतूड़ी को मुख्य सचिव नियुक्त करने का फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनके नाम के प्रस्ताव को ऐसे वक्त पर मंजूरी दी है, जब आगामी 31 मार्च को उनकी सेवानिवृत्ति प्रस्तावित है। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि उन्हें एक या उससे अधिक सेवा विस्तार मिल सकता है।
मूलरूप से मध्य प्रदेश की निवासी राधा रतूड़ी राज्य बनने पर उत्तराखंड कैडर ले लिया था। इसका असर उनकी वरिष्ठता पर भी पड़ा और मुख्य सचिव बनने में काफी विलंब हो गया। बेहद सहज-सरल और स्वच्छ छवि की राधा रतूड़ी प्रदेश की उन बहुत सीमित अधिकारियों में हैं, जिनके प्रति आमजन में बहुत सम्मान हैं। उनके पति अनिल रतूड़ी भी पुलिस महकमे के शीर्ष पद पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से सेवानिवृत हुए हैं।
राधा रतूड़ी के नाम राज्य की पहली महिला मुख्य सचिव होने के अलावा भी कई उपलब्धियां हैं। वे प्रदेश की पहली महिला मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) भी रही हैं। एक दशक से ज्यादा तक बतौर सीईओ उन्होंने लोकसभा और राज्य विधानसभा के कई महत्वपूर्ण आम चुनाव व उपचुनाव बेहतर ढंग से सम्पन्न कराए। वे टिहरी और देहरादून की डीएम भी रहीं। टिहरी की डीएम रहते उन्होंने जहां बांध विरोधी आंदोलन और बांध विस्थापितों की समस्याओं को सूझबूझ से सुलताया, वहीं साल-2003 में देहरादून की डीएम रहते राधा रतूड़ी ने प्रदेश के पहले और तब उत्तराखंड के एकमात्र नगर निगम (देहरादून) के चुनाव कुशलता से संपन्न कराए। यानी, उत्तराखंड में पहली मेयर को निर्वाचन प्रमाण-पत्र उन्हीं के हाथों जारी हुआ।

