आपदा प्रबंधनउत्तराखंड

जोशीमठ इंपेक्टः सभी जिलों में चिह्नित होंगे डेंजर जोन, डीएम की अध्यक्षता में बनेंगी सात सदस्यीय कमेटी

देहरादून। जोशीमठ भू-धंसाव पर आठ केंद्रीय संस्थानों की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद अब प्रदेश सरकार भी हरकत में आई है। सरकार की ओर से भी जिलों में ‘डेंजर जोन’ चिह्नित करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए प्रत्येक जिले में डीएम की अध्यक्षता में सात सदस्यीय कमेटी का गठन किया जाएगा। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर संवेदनशील भवनों को सुरक्षित बनाने के उपाय किए जाएंगे। इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तय की जाएगी।

भवनों को सुरक्षित बनाने के लिए तय की जाएगी एसओपीः अग्रवाल

जोशीमठ के संबंध में जो रिपोर्ट्स सामने आई हैं, उनमें से अधिकांश में शहरों, खासकर पहाड़ी शहरों-कस्बों की धारित क्षमता के अनुसार ही व्यवस्थित निर्माण पर जोर दिया गया है। इसे देखते हुए अब सरकार अब सभी जिलों का विभिन्न पहलुओं के आधार पर विस्तृत अध्ययन कराने जा रही है। प्रदेश के आवास एवं शहरी विकास मंत्री प्रेमंचद अग्रवाल ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार सभी 13 जिलों में वर्तमान में निर्मित ऐसे भवन जों भूकंप, भू-स्खलन, भू-धंसाव, अतिवृष्टि आदि की दृष्टि से जोखिम भरे भवनों की श्रेणी में आते हैं, उन्हें चिह्नित कर सुरक्षित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) संबंधी प्रस्ताव पर विचार कर रही है।
उन्होंने बताया कि सभी जिलों में भूकंप, भू-स्खलन, भू-धंसाव, अतिवृष्टि आदि जोखिम संभावित भवनों के चिह्निकरण और भवनों को सुरक्षित करने के संबंध में रिपोर्ट देने के लिए संबंधित डीएम की अध्यक्षता में सात सदस्यीय कमेटी गठित की जाएगी। कमेटी में संबंधित जिले के विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अथवा सचिव, संबंधित क्षेत्र के एसडीएम, पीडब्ल्यूडी अथवा सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता, सहायक भू-वैज्ञानिक (भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग), आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के निदेशक अथवा उनकी ओर से नामित प्रतिनिधि और संबंधित नगर निकाय के अधिशासी अधिकारी बतौर सदस्य शामिल रहेंगे। शहरी विकास मंत्री ने बताया कि इन सात सदस्यीय कमेटी में आवश्यकतानुसार कोई भी संबंधित विशेषज्ञ को आमंत्रित सदस्य के रूप में नामित किया जा सकता है। कमेटी अपने जिले में ऐसे निर्मित भवन, जो जोखिम संभावित हैं (मसलन, 30 डिग्री से अधिक ढाल पर निर्मित या नदियों के बाढ़ संभावित क्षेत्र में स्थित हैं, अथवा अन्य प्रकार से असुरक्षित हैं) उन्हें चिह्नित करेगी। ऐसे असुरक्षित भवनों का भी चिह्नीकरण किया जाएगा, जिन्हें रेट्रोफिटिंग से सुरक्षित किया जा सकता हो।

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