Thursday, October 15, 2026
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….पुष्कर के लिए ‘वरदान’ साबित हुआ सिलक्यारा टनल हादसा

ऋषिकेश। सिलक्यारा टनल हादसे ने भले ही पूरे देश-दुनिया को हिला कर रख दिया हो, लेकिन यही घटना टनल में फंसे श्रमिकों में शामिल 24 वर्षीय पुष्कर के लिए वरदान साबित हुई है। पुष्कर उन 41 श्रमिकों में शामिल था, टनल से बाहर निकलने पर जिनकी गहन मेडिकल जांच हुई। जब जांच हुई, तो स्वास्थ्य से जुड़ी ऐसी ‘गंभीर समस्या’ का पता चला, जो पुष्कर को जन्मजात थी और उसके जीवन को खतरे में डाल सकती थी। खुशखबरी यह है कि एम्स में ‘बड़े ऑपरेशन’ के जरिए पुष्कर की इस समस्या का समाधान कर लिया गया है। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद अब उसे घर भी भेज दिया गया है।

एम्स ऋषिकेश में श्रमिकों की मेडिकल जांच में पुष्कर के दिल के जन्मजात छेद का चला पता 

दरअसल, पुष्कर सिंह जब रोजगार की तलाश में चंपावत जिले के टनकपुर से उत्तरकाशी पहुंचा था, तो न उसे और न ही उसके परिजनों को मालूम था कि पुष्कर के दिल में जन्मजात छेद है। इस समस्या के चलते भविष्य में उसका जीवन खतरे में पड़ सकता था। बीते 12 नवंबर को उत्तरकाशी के सिलक्यारा टनल में हुए हादसे में पुष्कर समेत 41 श्रमिक फंस गए, जिन्हें 17 दिन बाद 28 नवंबर की रात रेस्क्यू किया गया। 29 नवंबर को सभी श्रमिकों को मेडिकल जांच के लिए एम्स ऋषिकेश लाया गया। हेलीकॉप्टर से एम्स लाए गए पुष्कर के स्वास्थ्य की भी चिकित्सकों ने गहन जांच की। स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान इको कार्डियोग्राफी करते समय मौके पर मौजूद कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वरूण कुमार ने पाया कि पुष्कर के दिल में छेद है। यह समस्या जन्मजात रोग के रूप में थी, लेकिन पुष्कर और परिजन इससे अनजान थे। 

ओपन हार्ट सर्जरी के बाद पूरी तरह स्वस्थ होने पर किया गया अस्पताल से डिस्चार्ज

ऐसे में डॉ. वरूण ने इस जानकारी को सीटीवीएस विभाग के वरिष्ठ सर्जन डॉ. अंशुमान दरबारी से साझा किया। पुष्कर की हिम्मत और एम्स के चिकित्सकों की मेहनत का परिणाम यह रहा कि बेहद जटिल रूप से की गई पुष्कर के दिल की ओपन हार्ट सर्जरी पूरी तरह सफल रही। पुष्कर अब स्वस्थ है और शुक्रवार को उसे डिस्चार्ज कर दिया।

कहते हैं कि कभी-कभी जाना कहीं और होता है, लेकिन किस्मत कहीं और ले जाती है। पुष्कर के साथ भी यही हुआ। सर्जरी प्रक्रिया की जानकारी देते हुए एम्स के हार्ट एंड लंग्स सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग के वरिष्ठ सर्जन डॉ. अंशुमान दरबारी ने बताया कि यदि पुष्कर एम्स नहीं पंहुचता, तो शायद उसे समय रहते पता नहीं चल पाता कि उसके दिल में छेद है। वह रोजगार के लिए गया तो उत्तरकाशी था, लेकिन टनल में फंस जाने के कारण किस्मत उसे अन्य श्रमिकों के साथ एम्स ले आई। उन्होंने बताया कि जब 1 दिसम्बर को सभी श्रमिकों को एम्स से डिस्चार्ज किया जा रहा था, तो उस समय पुष्कर शारीरिक और मानसिक तौर से सर्जरी करवाने के लिए सक्षम नहीं था। इसलिए, सर्जरी के लिए उसे दोबारा एम्स बुलाया गया। यह सर्जरी पिछले सप्ताह 28 दिसम्बर को की गई। सर्जरी करने वाली टीम में उनके साथ ही डॉ. अविनाश और ऐनेस्थीसिया से डॉ. अंकित अग्रवाल व डॉ. पूजा आहुजा शामिल थे।

मुख्यमंत्री भी ले रहे थे स्वास्थ्य का अपडेट, आयुष्मान भारत से हुआ मुफ्त इलाज

पुष्कर सिंह के ईलाज के मामले में एम्स निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह खुद व्यक्तिगत रूप से रूचि लेते हुए चिकित्सकों का मार्गदर्शन कर रही थीं। वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी लगातार उक्त श्रमिक के स्वास्थ्य की अपडेट ले रहे थे। डॉ. मीनू सिंह ने बताया कि पुष्कर के पूरा इलाज राज्य सरकार की अटल आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के तहत निःशुल्क हुआ है। उन्होंने कहा कि एम्स ऋषिकेश राज्य में अकेला ऐसा सरकारी स्वास्थ्य संस्थान है, जहां आयुष्मान भारत योजना के तहत हार्ट एंड लंग्स सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है। 

टनल में फंसकर न पहुंचता मेडिकल जांच को तो भविष्य में हो सकती थी गंभीर समस्या 

एम्स के चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, उम्र कम होने के कारण पुष्कर को भले ही अभी कोई बड़ी परेशानी नजर न आ रही थी, लेकिन उम्र बढ़ने पर भविष्य में उसे शारीरिक गतिविधियों के बाद सांस लेने में तकलीफ होने, कुछ भी काम करते वक्त अत्यधिक थकान महसूस होने और अनियमित स्तर पर तेजी से दिल धड़कने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता था। अब समय रहते सर्जरी हो जाने से उसे यह समस्या नहीं होगी। 

एम्स में अब तक दिल में छेद के 1000 से ज्यादा मामलों में की जा चुकी सर्जरी

ऋषिकेश एम्स का सीटीवीएस विभाग वर्ष-2017 में अस्तित्व में आया था। तब से अब तक इस विभाग के सर्जन 1 हजार से अधिक लोगों के दिल और फेफड़े की सर्जरी कर चुके हैं। डॉ. दरबारी ने इस बाबत बताया कि बेहतर जांचों से सभी उम्र के लोगों में हृदय रोगों के जल्दी पता लग जाने और गर्भावस्था के दौरान बच्चों के दिल का विकास ढंग से नहीं होने के कारण दिल में छेद होने के मामले लगातार मालूम हो रहे हैं। ऐसे में समय रहते उनके इलाज की सुविधा भी उपलब्ध है।

 

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