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पार्वती सरोवर किनारे आदि कैलाश के समक्ष ध्यानमग्न हुए मोदी

पिथौरागढ़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीरवार सुबह भारत-चीन सीमा से सटी भारत की आध्यात्मिक भूमि आदि कैलाश पहुंचे। यहां शिव मंदिर में प्रधानमंत्री ने पूजा अर्चना की और आदि कैलाश के दर्शन किए। वे पार्वती सरोवर के किनारे कुछ देर आदि कैलाश की ओर मुख करके ध्यानमग्न अवस्था में भी बैठे।

प्रधानमंत्री मोदी अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत सुबह 8.45 बजे हेलीकॉप्टर से ज्योलिंगकांग हेलीपैड पहुंचे।यहां से दाहिनी ओर करीब डेढ़ किमी की दूरी कार से तय करते हुए हिमालय की चोटी पर स्थित पार्वती सरोवर और शिव मंदिर पहुंचे। करीब 25 मिनट तक उन्होंने भगवान शिव की पूजा-अर्चना और ध्यान किया। आदि कैलाश मंदिर में स्थानीय रं-समुदाय के लामा पुजारियों ने पौराणिक काल से प्रसिद्ध शिव-पार्वती की ‘माटी पूजा’ पूरे विधि-विधान से संपन्न कराई।

आदि कैलाश के दर्शन कर मन प्रसन्न और जीवन धन्य हो गयाः मोदी
इसके बाद पीएम मोदी ने आदि कैलाश पर्वत और पार्वती सरोवर के दर्शन भी किए। आदि कैलाश और पार्वती सरोवर के दर्शन कर प्रधानमंत्री अभीभूत हो उठे। उन्होंने कहा कि आदि कैलाश के दर्शन कर उनका मन प्रसन्न और जीवन धन्य हो गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देव भूमि है। यहां कण-कण में देवी देवताओं का वास है। भगवान आदि कैलाश के दर्शन कर उन्हें परम आनंद की अनुभूति हुई है। उन्होंने कहा कि देवभूमि के मंदिर आस्था ही नही आर्थिकी का भी केंद्र हैं। इन मंदिरों से हजारों लोगों की आर्थिकी प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जुड़ी है। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सभी मंदिरों को एक सर्किट के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री को आदि कैलाश और आसपास के क्षेत्र के बारे जानकारी दी।

चीन सीमा पर तैनात सेना के जवानों में भरा जोश

प्रधानमंत्री के भ्रमण से चीन सीमा पर तैनात सेना के जवानों के साथ ही सीमा पर बसे गांव कुटी, नाबि, रोंगकांग, गुंजी, नपल्चयू, गर्व्यांग, बूंदी के ग्रामीणों में गजब उत्साह देखने को मिला। आदि कैलाश के दर्शन करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ज्योलिंगकांग हैलीपेड से गुंजी के लिए रवाना हुए। प्रधानमंत्री मोदी आदि कैलाश की यात्रा करने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री भी बन गए है। तीन देशों की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लगी इस भूमि से प्रधानमंत्री ने पूरे विश्व को अध्यात्म और वैश्विक क्षेत्र में उभरती भारत की शक्ति का संदेश भी दिया। प्रधानमंत्री के भ्रमण से आदि कैलाश क्षेत्र में आध्यात्मिक पर्यटन की संभावनाएं बढ गई है। आदि कैलाश 14 हजार फुट से अधिक ऊॅचाई पर चीन और नेपाल की सीमा से सटा है। आदि कैलाश के बारे में मान्यता है कि यह स्थान भगवान शिव के परिवार का निवास स्थान है। आदि कैलाश मार्ग पर मुख्य आकर्षण ओम पर्वत है। इस पर्वत पर ओम की आकृति उभरी हुई है। ओम पर्वत कैलाश यात्रा मार्ग में नावीढांगा में स्थित है। ओम पर्वत को आदि कैलाश का छोटा कैलाश भी कहा जाता है।

रं-समाज के रंग में रंगे नजर आए प्रधानमंत्री को मातृशक्ति से मिला भरपूर आशीष

गुंजी गांव में प्रधानमंत्री ने स्थानीय लोगों से मिलकर उनसे बातचीत की। दूर-दराज से पहुंचे लोग प्रधानमंत्री को अपने बीच पाकर काफी खुश नजर आए। इस दौरान प्रधानमंत्री ने च्यूबाला पहनी रंगस्या (महिलाओं) से आशीर्वाद भी लिया। गुंजी में सेना के जवानों के साथ बातचीत कर प्रधानमंत्री ने उनका हौसला बढ़ाया। प्रधानमंत्री ने रं समाज कल्याण समिति के लोगों से भी भेंट की। रं समाज कल्याण समिति के लोग पारंपरिक वेशभूषा में थे। प्रधानमंत्री मोदी भी पूरी तरह रं-समाज के लोकरंग में रंगे नजर आए।

प्रधानमंत्री ने भारत-तिब्बत व्यापार के प्रमुख केंद्र गुंजी गांव में स्थानीय कला और उत्पादों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इस अवसर पर उन्होंने आदि कैलाश, पार्वती सरोवर, कुटी गांव, रांगकॉग गांव, नाबी, गुंजी, ओम पर्वत की फोटो गैलरी का भी अवलोकन किया। गुंजी में मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री को अंग वस्त्र व प्रतीक चिह्न के रूप में ओम पर्वत की फोटो भेंट की। वहीं, रं समाज ने मानसरोवर का पवित्र जल भरा कलश भेंट किया।

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