उत्तराखंडमुद्दा

राज्य आंदोलनकारियों के आरक्षण संबंधी विधेयक पर प्रवर समिति ने की चर्चा

देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरंक्षण प्रदान करने संबंधी विधेयक पर विधानसभा की प्रवर समिति ने बुधवार को विचार विमर्श किया। पक्ष-विपक्ष के सदस्य विधायकों की राय संकलित करके समिति प्रारूप को अंतिम रूप देने से पहले एक और बैठक करेगी।

राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को राज्याधीन सेवाओं में 10 फीसद आरक्षण की व्यवस्था थी, लेकिन कुछ साल पहले यह व्यवस्था हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद समाप्त कर दी गई। इससे गुस्साए आंदोलनकारी लगातार आंदोलनरत रहे। पूर्ववर्ती हरीश रावत सरकार ने आरक्षण की बहाली और सरकारी सेवारत आंदोलनकारी कर्मियों की सेवा सुरक्षा के लिए विधानसभा से विधेयक पारित कराकर राजभवन भेजा था, जो पिछले राज्यपाल लटकाए रहे। आंदोलनकारियों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए मौजूदा पुष्कर सिंह धामी सरकार के प्रयासों से वर्तमान राज्यपाल ने उक्त विधेयक सरकार को वापस भेजा। इस विधेयक को हालिया सत्र में सरकार ने विधानसभा में पेश किया। चर्चा के दौरान विधेयक में कुछेक खामियों को देखते हुए इसे दुरूस्त करने की मंशा से प्रवर समिति को सौंपने का निर्णय किया गया।

प्रारूप को अंतिम रूप देने से पूर्व जल्द ही आयोजित की जाएगी एक और बैठक : अग्रवाल

संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल की अध्यक्षता में प्रवर समिति ने इस संबंध में बैठक बुलाई, लेकिन पिछली बैठक में विपक्ष के विधायक नदारद रहे। इसके चलते बैठक स्थगित करनी पड़ी थी। बुधवार को उक्त बैठक पुनः आहूत की गई। इस बार इसमें सत्तारूढ़ भाजपा के विधायक विनोद चमोली, मुन्ना सिंह चौहान, उमेश शर्मा काऊ, कांग्रेस विधायक भुवन कापड़ी और बसपा के विधायक मो. शहजाद समेत प्रवर समिति के सभी सदस्य मौजूद रहे। बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष व संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने बताया कि बैठक में सभी सदंस्यों के सुझावों को संकलित किया गया है। प्रारूप अपने अंतिम चरण में है। इसे अंतिम रूप देने से पूर्व जल्द ही समिति की एक और बैठक आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी की मंशा यही है कि सभी राज्य आंदोलनकारियों के हित सुरक्षित हो सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *