गौरवशाली अतीत को समेटे 107 साल की हुई यह इमारत
देहरादून। गुरु रामरायजी के आगमन से लेकर नेपाल के कब्जे और अंग्रेजी राज तक विभिन्न कालखंड में बने-बसे देहरादून शहर में अब कुछेक ही निशानियां बाकी बची हैं, जो पुराने देहरा के इतिहास को खुद में समेटे हैं। इन्हीं में एक ऐतिहासिक इमारत ऐसी भी है, जिससे देहरादून ही नहीं, उत्तराखंड से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पंजाब तक के असंख्य लोगों की यहां अपने शैक्षिककाल के दौरान की तमाम स्मृतियां जुड़ी हैं। यह इमारत दून ही नहीं, समूचे उत्तराखंड की बहुत खास ईमारतों में से एक है। हम बात कर रहे हैं डीएवी काॅलेज की मुख्य इमारत की। इतिहास और स्मृतियों को अपनेआप में समेटे देहरा की यह ऐतिहासिक धरोहर बुधवार 26 अप्रैल को अपना बुनियादी पत्थर रखे जाने के 107 साल पूरा कर चुकी है।

देश-दुनिया में बहुत खास जगह बनाने वाले दयानंद एंग्लो वैदिक स्नातकोत्तर महाविद्यालय यानी डीएवी काॅलेज की इस मुख्य बिल्डिंग की आधारशिला ब्रिटिश देहरा के करनपुर गांव में 26 अप्रैल के दिन ही रखी गई थी। 1892 में आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंदजी की स्मृति में मेरठ में डीएवी स्कूल स्थापित किया गया था। साल-1904 में इस स्कूल को मेरठ से देहरा के करनपुर गांव में स्थानांतरित कर दिया गया था। डीएवी का आना वह महत्वपूर्ण घटना थी, जिसने आगे चलकर न केवल देहरा में स्वाधीनता आंदोलन को गति देने की जमीन तैयार की, अपितु समूचे गढ़वाल क्षेत्र में सामाजिक-राजनीतिक चेतना को जागृत करने में भी योगदान किया। साल-1911 में ठा. पूरण सिंह नेगी ने करनपुर में डीएवी स्कूल के विस्तार के लिए अपनी जमीन और धन दान कर दिया। वर्ष-1922 में डीएवी स्कूल ने इंटर काॅलेज के रूप में आगे कदम बढ़ाया। भविष्य के दशकों में विस्तारित होने के साथ ही डीएवी उत्तराखंड का सर्वाधिक छात्र संख्या वाला महाविद्यालय भी बना।

26 अप्रैल 1916 को रखी गई थी बिल्डिंग की आधारशिला
ठीक 107 साल पहले 26 अप्रैल 1916 के दिन तत्कालीन संयुक्त प्रांत आगरा और अवध के डिप्टी गवर्नर जेम स्कौजी मेस्टन ने करनपुर में डीएवी स्कूल की मुख्य बिल्डिंग की आधारशिला रखी थी। ओरिएंटल पैटर्न की वास्तुकला के उत्कृष्ट नमूने के तौर पर आज भी शान से खड़ी डीएवी काॅलेज की यह मुख्य इमारत सभी का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट करती है। सन-1946 में ग्रेजुएट और सन-1948 में पोस्टग्रेजुएट की मान्यता पाने वाले डीएवी काॅलेज ने माॅरीशस के राष्ट्रपति रहे सर शिवसागर रामगुलाम, नेपाल के प्रधानमंत्री रहे लोकेश बहादुर चंद, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे स्व. हेमवती नंदन बहुगुणा, उत्तराखंड के प्रथम मुख्यमंत्री स्व. नित्यानंद स्वामी, देहरादून के पहले सांसद स्व. महावीर त्यागी, गढ़वाल के पहले सांसद और देश में केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना में अहम भूमिका निभाने वाले केंद्रीय उप शिक्षामंत्री स्व. भक्तदर्शन, एवरेस्ट विजेता प्रथम भारतीय महिला बचेंद्री पाल, थल सेनाध्यक्ष रहे स्व. जनरल बीसी जोशी, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के चेयरमैन रहे ओपी भट्ट समेत अनगिनत हस्तियां इसी डीएवी काॅलेज से होकर निकली हैं।

